
सार्वजनिक जमीन पर धार्मिक गतिविधियों का कोई विशेषाधिकार नहीं, इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा आदेश
कोर्ट ने कहा कि धर्म का पालन करने का अधिकार असीमित नहीं है। यह सार्वजनिक व्यवस्था, आवाजाही और दूसरों के शांतिपूर्ण जीवन के अधिकार के अधीन है। ऐसी धार्मिक प्रथा या परंपरा की नई शुरुआत या विस्तार, जो पहले से नहीं थी, जिससे सामाजिक संतुलन बिगड़ने की आशंका हो, उसे संवैधानिक संरक्षण नहीं दिया जा सकता।
Source: Live Hindustan via DNI News

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