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CSJMU से करें जैन दर्शन में ग्रेजुएशन:जैन शोध पीठ में पढ़ाई जाएंगी प्राकृत भाषा, लिपियों का होगा अध्ययन
छत्रपति शाहू जी महाराज यूनिवर्सिटी (सीएसजेएमयू) में संचालित आचार्य विद्यासागर सुधासागर जैन शोधपीठ में नए शैक्षिणक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। विभाग में स्नातक स्तर पर जैनदर्शन एवं परा स्नातक स्तर पर प्राकृत भाषा और जैनदर्शन पाठ्यक्रम संचलित हैं, जिसमे 30-30 सीटें उपलब्ध है। इसके अलावा प्राकृत भाषा और जैन दर्शन से डिप्लोमा और सर्टिफिकेट के कोर्स भी संचालित हैं। इस वर्ष बीए में जैनदर्शन का नवीन कोर्स संचालित किया जा रहा है।
प्राचीन ब्राह्मी और शारदा लिपि का होगा अध्ययन पीठ के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ कोमल चन्द्र जैन ने बताया की विभाग में संचालित प्राकृत भाषा कोर्स में नए सत्र से प्राचीन ब्राह्मी और शारदा लिपियों का भी अध्ययन कराया जायेगा। जिससे छात्र प्राचीन लिपियों और भारतीय ज्ञान परंपरा को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कार्य कर सकेंगे। अब छात्र न केवल प्राचीन प्राकृत भाषा का अध्ययन कर सकेंगे, बल्कि विद्वानों के मार्गदर्शन द्वारा बहुमूल्य पांडुलिपियों के संपादन और संरक्षण की बारीकियों को भी सीख सकेंगे। यूजीसी नेट की कराएंगे तैयारी जैन शोधपीठ द्वारा प्राकृत भाषा में UGC NET परीक्षा की तैयारी भी कराई जाएगी, जिससे विद्यार्थी प्राकृत भाषा में शोध कार्य कर सकेगें। प्राकृत भाषा में लगभग 10 हजार से अधिक पाण्डुलिपि उपलब्ध हैं। पीठ का प्रमुख उद्देश्य प्राकृत भाषा और अपभ्रंश भाषा में लिपिवध्द प्राचीन ज्ञान को आधुनिक संदर्भों में सामने लाना है। प्रवेश से संबधित अधिक जानकारी के लिए इच्छुक छात्र विभाग से सम्पर्क कर सकते हैं। विभाग में वर्तमान में कोर्स जानिए-
Source: Dainik Bhaskar via DNI News
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