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China का गेम ओवर, जापान और भारत ने कर ली कौन सी महाडील?

China का गेम ओवर, जापान और भारत ने कर ली कौन सी महाडील?

China का गेम ओवर, जापान और भारत ने कर ली कौन सी महाडील?

नई दिल्ली के गलियारों से लेकर टोक्यो के सत्ता केंद्रों तक एक ऐसी हलचल शुरू हुई है जिसने बीजिंग की रातों की नींद उड़ा दी है। भारत और जापान ने आधिकारिक तौर पर एक ऐसे समझौते पर मुर लगा दी है जो ना केवल इन दो देशों का भविष्य बदलेगा बल्कि पूरे इंडोपेसिफिक क्षेत्र में शक्ति के संतुलन को नई दिशा देगा। भारत जापान इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग के दूसरे दौरे में वह बड़ा फैसला लिया गया जिसकी धमक आने वाले कई दशकों तक महसूस की जाएगी। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिश्री और जापान के वरिष्ठ मंत्रियों के बीच हुई इस बैठक का सीधा लक्ष्य है ग्लोबल सप्लाई चेन से चीन के वर्चस्व को उखाड़ फेंकना। दोनों देशों ने तय किया कि वे रणनीतिक औद्योगिक क्षेत्रों में अपने सहयोग को उस स्तर पर ले जाएंगे जहां कोई बाहरी ताकत या भू राजनीतिक तनाव भारत की प्रगति की रफ्तार को रोक ना सके। यह समझौता मुख्य रूप से उन सेक्टर्स पर केंद्रित है जिन्हें भविष्य की अर्थव्यवस्था की रीड माना जाता है। 

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गौर करने वाली बात यह है कि भारत और जापान अब सिर्फ व्यापारिक साझेदार नहीं रहे बल्कि यह एक ऐसी सुरक्षा दीवार खड़ी करने जा रहे हैं जो सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, उन्नत मैन्युफैक्चरिंग और उभरती हुई तकनीकों को सुरक्षित करेगी। आज के दौर में जब दुनिया सप्लाई चेन के टूटने और युद्धों के कारण पैदा हुई अनिश्चितता से जूझ रही है तब भारत और जापान ने विश्वसनीय सप्लाई चेन यानी कि ट्रस्टेड सप्लाई चेन का नया नारा बुलंद किया है। इसका मतलब साफ है तकनीक जापान की होगी। जमीन और हुनर भारत का होगा और यह गठबंधन दुनिया को एक सुरक्षित विकल्प देगा। भारत और जापान की यह दोस्ती दशकों पुरानी है। जापान आज भारत में निवेश करने वाले सबसे बड़े देशों में से एक है। लेकिन अब यह साझेदारी बुनियादी ढांचे और ट्रेन प्रोजेक्ट से आगे बढ़कर रक्षा और उच्च तकनीक के मोर्चे पर आ गई है। टोक्यो और नई दिल्ली का यह बढ़ता तालमेल इस बात का सबूत है कि एशिया की यह दो बड़ी ताकतें अब किसी भी तीसरे देश की मनमानी बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। 

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इन प्रशांत क्षेत्र को खुला, स्वतंत्र और सुरक्षित रखने के लिए भारत का मजबूत होना बहुत जरूरी है और जापान इस हकीकत को बखूबी समझता है। यानी यह डायलॉग सिर्फ कागजी कारवाही नहीं है बल्कि एक स्पष्ट संदेश है कि भारत अब दुनिया की फैक्ट्री बनने के लिए तैयार है और चीन पर निर्भरता कम करने के लिए जापान अपनी फैक्ट्रियों और तकनीक को भारत में शिफ्ट करने के लिए बड़े कदम उठाने जा रहा है। जिससे भारत की औद्योगिक शक्ति में जबरदस्त इजाफा होगा। खैर राजशित में लिए गए इस फैसले ने साफ कर दिया कि कि आने वाला समय भारत का है। 

Source: Prabha Sakshi via DNI News

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