
महाकुंभ हादसा: हाईकोर्ट से निश्चित प्रक्रिया, न्याय और व्यवस्था की सही राह
‘जब कोई त्रासदी होती है, तो दो तरह के लोग सामने आते हैं। एक वे जो घाव भरने में लगते हैं और दूसरे वे जो घाव कुरेदते रहते हैं। इसलिए नहीं कि उन्हें पीड़ितों की चिंता है, बल्कि उन्हें उस दर्द में अपना राजनीतिक भविष्य दिखता है।’
Source: Live Hindustan via DNI News

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