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प्रीपेड या पोस्टपेड का विकल्प उपभोक्ताओं को मिले:यूपी नियामक आयोग की दो सदस्यीय पीठ के सामने अर्जेन्सी एप्लीकेशन दाखिल
उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में बुधवार को उपभोक्ता परिषद की ओर से स्मार्ट मीटर को लेकर एक अर्जेंसी एप्लीकेशन दाखिल की गई। इसमें मांग की गई है कि राष्ट्रीय कानून के तहत स्मार्ट मीटर में प्रीपेड व पोस्टपेड का विकल्प आम उपभोक्ताओं को देने का आदेश जारी करें। ये याचिका आयोग की दो सदस्यीय पीठ के सामने पेश की गई है और इस पर तत्काल सुनवाई की मांग की गई है। नियामक आयोग बुधवार को जल विद्युत निगम की मल्टी ईयर टैरिफ पर आम लोगों की सुनवाई कर रही थी। इसी दौरान उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग की अनुमति से स्मार्ट प्रीपेड मीटर के अत्यंत गंभीर मुद्दे को उठाया और एक प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने आयोग से तत्काल राष्ट्रीय कानून के तहत स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर आदेश जारी करने की मांग की। परिषद की 5 प्रमुख मांगें बिजली कंपनियां विद्युत अधिनियम का उल्लंघन कर रहीं आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार, सदस्य संजय कुमार सिंह और सचिव की उपस्थिति में परिषद ने आयोग से मांग की कि इस विषय पर पूर्व में दाखिल लोक महत्व प्रस्ताव पर तत्काल निर्णय सुनाया जाए। परिषद ने अवगत कराया कि पूरे प्रदेश के कई जिलों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर के खिलाफ लोग विरोध-प्रदर्शन को मजबूर हैं। कई स्थानों पर महिलाएं सबस्टेशनों का घेराव कर रही हैं। परिषद ने कहा कि आयोग कानपुर की सुनवाई के दौरान खुद इस मामले को देख चुका है, तब कई महिला उपभोक्ता भावुक हो गई थीं। इसके बावजूद पावर कॉरपोरेशन एवं विद्युत वितरण कंपनियां लगातार विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) का उल्लंघन कर रही हैं। प्रदेश में 70 लाख पोस्टपेड मीटर को जबरन प्रीपेड में बदल दिया केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा 1 अप्रैल 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता समाप्त हो गई है। बावजूद प्रदेश की बिजली सप्लाई कंपनियां इस आदेश पर अमल नहीं कर रही हैं। वे अभी भी नए बिजली कनेक्शन के लिए प्रीपेड स्मार्ट मीटर ही लगा रहे हैं। प्रदेश में 70 लाख पोस्टपेड उपभोक्ताओं के कनेक्शन बिना उनकी सहमति के प्रीपेड में बदल दिए गए। इन कनेक्शनों को भी वापस पोस्टपेड में नहीं किया जा रहा है। जबकि लाखों की संख्या में ऐसे उपभोक्ताओं के प्रार्थना पत्र बिजली कंपनियों के पास पहुंचे हैं। आम लोगों को गुमराह कर रही बिजली कंपनियां अवधेश वर्मा ने अपनी याचिका में कहा कि नई ‘ कास्ट डेटा बुक’ में यह प्रावधान है कि यदि किसी उपभोक्ता के पोस्टपेड कनेक्शन को प्रीपेड में बदला जाता है, तो उसकी सुरक्षा राशि (सिक्योरिटी) को बिल में समायोजित किया जाना चाहिए। इसका सीधा मतलब है कि धारा 47(5) स्वतः लागू होती है। इसके लिए उपभोक्ता की सहमति अनिवार्य है। यदि उपभोक्ता सहमति नहीं देता, तो उसका कनेक्शन पोस्टपेड मोड में ही रहना चाहिए। इसके बावजूद भी बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं को गुमराह कर रही है नई कास्ट डाटा बुक में शामिल किया जाए अधिसूचना उपभोक्ता परिषद ने आयोग से मांग की कि नई कास्ट डाटा बुक में विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) एवं केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की 1 अप्रैल 2026 की अधिसूचना को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। साथ ही, नए विद्युत कनेक्शन एवं आरडीएसएस योजना के तहत लगाए जाने वाले सभी मीटरों पर राष्ट्रीय कानून का पूर्णतः पालन सुनिश्चित किया जाए।
Source: Dainik Bhaskar via DNI News
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