![]()
पहचान छिपाने को बर्खास्त सिपाही ने भिखारी को जिंदा जलाया:हाथरस में प्लेटफॉर्म पर मिला था शव, 13 मुकदमों का आरोपी, सैफई से जली हालत में अरेस्ट
हाथरस में जेल जाने से बचने के लिए बर्खास्त सिपाही ने लावारिस भिखारी को जिंदा जलाकर मार डाला। लाश को रेलवे स्टेशन पर फेंक दिया। वहां अपना आधार कार्ड और जला मोबाइल छोड़ दिया, ताकि पुलिस उसे मृत मान ले। इस दौरान वह खुद बुरी तरह जल गया। दो दिन बाद चोरी-छिपे जिला अस्पताल में भर्ती हुआ, जहां से सैफई पीजीआई रेफर हो गया। अस्पताल में खुद को प्राइवेट गाड़ी चालक और सीएनजी सिलेंडर ब्लास्ट की झूठी कहानी बताई, लेकिन नाम-पता ओरिजनल लिखा दिया। जीआरपी टीम ने बताया- आरोपी पहले यूपी पुलिस में सिपाही था। बरेली में पोस्टेड था। ड्यूटी के दौरान उस पर हत्या समेत 13 मुकदमे दर्ज हुए। जिसके चलते 2013 में बर्खास्त कर दिया गया था। जेल जाने से बचने के लिए उसने अपनी कद-काठी से मिलते-जुलते लावारिस भिखारी की जिंदा जलाकर हत्या कर दी थी। अब पूरा मामला सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए…
जीआरपी को 12 मार्च को हाथरस रोड स्टेशन के प्लेटफॉर्म से एक जली लाश मिली थी। पुलिस को शव के पास से आधार कार्ड और मोबाइल फोन भी मिला। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर मामले की जांच की जा रही थी। आधार कार्ड पर रामवीर सिह (55) पुत्र सीताराम लिखा था। पता- मैनपुरी के किशनी थाना क्षेत्र अंतर्गत बघौनी गांव दर्ज था।
जीआरपी की टीम दो दिन बाद बर्खास्त सिपाही रामवीर सिंह के गांव पहुंची। पुलिस ने जांच की। मुखबिर ने पुलिस को बताया कि रामवीर सिंह अस्पताल में भर्ती है। वह पूरी तरह से झुलसा है। जीआरपी रामवीर के घर नहीं गई और आगे की जांच शुरू की।
इधर, जिला अस्पताल से आई रिपोर्ट में पता चला कि 14 मार्च को एक व्यक्ति गंभीर रूप से झुलसा हुआ आया है, जिसे सैफई रेफर कर दिया गया है। जीआरपी हाथरस सिटी थाना प्रभारी सुयश सिंह ने बताया- जब जिला अस्पताल में भर्ती मरीज के एडमिट पेपर की जांच की गई तो पता चला, इसका नाम और पता, 12 मार्च को भिखारी के शव के पास मिले आधार कार्ड के नाम-पते से हूबहू मैच कर रहा था। अस्पताल पहुंचकर पूछताछ की गई तो पता चला कि मरीज रेफर हो गया है। पुलिस उसे तलाशते हुए सैफई मेडिकल कॉलेज पहुंची। वहां पर भी मरीज ने वही नाम-पता लिखवा रखा था। पुलिस उसके ठीक होने का इंजार करने लगी। हालत सुधार होने पर मंगलवार रात हिरासत में लेकर हाथरस ले आई। पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया है। अब जानिए क्यों और कैसे की थी हत्या…
जीआरपी प्रभारी सुयश सिंह ने बताया- रामवीर सिंह आपराधिक प्रवृत्ति का था। ड्यूटी के दौरान उसके खिलाफ वर्ष 2012-13 में हत्या, हत्या का प्रयास समेत कुल 13 मुकदमे दर्ज हुए। जिनके चलते उसे 2013 में पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। उसकी लास्ट पोस्टिंग बरेली के सुभाषनगर थाने में थी।
जीआरपी ने बताया- बर्खास्त किए जाने के बाद रामवीर सिंह कई दिनों से फरार चल रहा था। पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। इसीलिए गिरफ्तारी और जेल जाने से बचने के लिए उसने षड्यंत्र रचा। उसने एक ऐसे व्यक्ति को ढूंढा, जिसका कोई जानने वाला ना हो। तलाश हाथरस रोड रेलवे प्लटेफॉर्म पर रहने वाले एक भिखारी पर खत्म हुई। प्लेटफॉर्म पर ना तो कोई कर्मचारी रहता था, ना ही रात के समय कोई ट्रेन रुकती थी। 12 मार्च की देर रात सोते समय उसने भिखारी पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। जिससे भिखारी की जिंदा जलकर मौत हो गई। पुलिस को गुमराह करने के लिए उसने अपना जला हुआ आधार कार्ड और मोबाइल फोन भी शव के पास रख दिया। सिपाही का प्लान था कि पुलिस उसे मृत मान लेगी। परिवार के लोग भी भिखारी के डेडबॉडी को उसकी डेडबॉडी मान लेंगे और उस पर चल रहे केस खत्म हो जाएंगे। वह कहीं और चला जाएगा। इस मामले में उसके परिवार की क्या भूमिका है, उसकी भी पुलिस जांच कर रही है। जलने के बावजूद दो दिन तक छिपता रहा
केरोसिन छिड़कने के दौरान रामवीर सिंह खुद भी बुरी तरह जल गया। पकड़े जाने के डर से वह दो दिनों तक छिपता रहा। मेडिकल स्टोर से दवा लेकर अपना खुद ही इलाज करता रहा। आखिरकार 14 मार्च को हाथरस जिला अस्पताल में एडमिट होने पहुंचा। 40 परसेंट जला होने के कारण रामवीर सिंह की हालत बेहद गंभीर थी तो डॉक्टरों ने उसे रेफर कर दिया गया। वह 14 मार्च की रात ही सैफई में जाकर भर्ती हो गया। दोनों जगहों पर उसने एक ही कहानी बताई। उसने खुद को ड्राइवर बताया। कार का सिलेंडर फट जाने से जलने की बात कही। इन तीन वजहों से पकड़ा गया 1- जीआरपी को गांव में यह बात पता चल गई कि रामवीर मरा नहीं है। उसके परिवार वाले सैफई मेडिकल कॉलेज में इलाज करा रहे हैं।
2-रेलवे स्टेशन पर ही भिखारी रहता था। वह कहीं जाता नहीं था। वह भी लापता था। इसलिए पुलिस का शक और बढ़ गया।
3- बर्खास्त सिपाही ने हाथरस जिला अस्पताल और सैफई पीजीआई में अपना असली नाम और पते से पेशेंट पर्चा बनवाया था। इससे पुलिस ने उसे ट्रेस कर लिया। फिरोजाबाद, अलीगढ़, मुरादाबाद, हरदोई, मैनपुरी और बंदायूं में वॉन्टेड
जीआरपी ने बताया- रामवीर सिंह के खिलाफ 2012 से 2013 के बीच फिरोजाबाद, मुरादाबाद, अलीगढ़, मैनपुरी, बदायूं और कानपुर देहात में कुल 13 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। 2012 में बदायूं के सिविल लाइंस थाने में हत्या और 2013 में फिरोजाबाद के मटसैना थाने में हत्या के प्रयास का मुकदमा पंजीकृत है। 2013 में मटसैना थाने से गैंगस्टर एक्ट भी लगाया जा चुका है। वह लगातार फरार चल रहा था। इकलौते बेटे की मौत, 5 बेटियां मां के साथ रह रहीं
पुलिस ने बताया- रामवीर सिंह का परिवार मैनपुरी में ही रहता है। उसके कुल 6 बच्चे थे, जिनमें से इकलौते बेटे की मौत हो चुकी है। परिवार में 5 बेटियां बची हैं, जो अपनी मां के साथ रहती हैं। —————————————– ये खबर भी पढ़िए… संभल में ईदगाह-इमामबाड़ा को बुलडोजर चल रहा:भीड़ को अफसरों ने हटाया, 5 थानों की फोर्स और PAC तैनात
संभल में ईदगाह और इमामबाड़े पर गुरुवार सुबह 8 बजे से बुलडोजर की कार्रवाई चल रही है। इमामबाड़ा गिरा दिया गया है। अब ईदगाह को चार बुलडोजरों से तोड़ा जा रहा है। मौके पर 5 थानों की पुलिस फोर्स और एक कंपनी PAC तैनात की गई है। इसी बीच, गांव के लोग मौके पर जुट गए। विरोध की आशंका को देखते हुए अफसरों ने उन्हें वहां से हटा दिया। प्रशासन के मुताबिक, करीब 7 बीघा चारागाह की जमीन पर ईदगाह और खाद गड्ढे की भूमि पर इमामबाड़ा बनाया गया था। पूरी खबर पढ़िए…
Source: Dainik Bhaskar via DNI News
Leave a Reply