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काशी में विद्वानों ने संस्कृत भाषा में किया शास्त्रार्थ:वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में हुआ आयोजन, संस्कृत भाषा में सवाल-जवाब
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के वाग्देवी मंदिर मंडप में बुधवार को व्याकरण विभाग की ओर से शास्त्रार्थ सभा का आयोजन किया गया। यहां संस्कृत के विद्वानों ने संस्कृत भाषा में जमकर शास्त्रार्थ किया। एक दूसरे को संस्कृत में ही सवाल-जवाब दिया। इसकी अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा, काशी में देवभाषा संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन की परम्परा अत्यंत प्राचीन एवं गौरवशाली रही है। यहां की विद्वता ने न केवल भारत बल्कि विश्व स्तर पर संस्कृत ज्ञान के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शास्त्रार्थ भारतीय ज्ञान प्रणाली की आत्मा है, जिसके माध्यम से तर्क, प्रमाण एवं संवाद द्वारा सत्य की स्थापना होती है। वर्तमान समय में इस परम्परा को जीवित रखना अत्यंत आवश्यक है, जिससे नई पीढ़ी में शास्त्रीय ज्ञान के प्रति रुचि और गहन समझ विकसित हो सके। कार्यक्रम के संयोजक व्याकरण विभाग के सहायक आचार्य डॉ. दिव्य चेतन ब्रह्मचारी रहे, जिन्होंने इस आयोजन के माध्यम से शास्त्रार्थ परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन का सराहनीय प्रयास किया। शास्त्रार्थ सभा में व्याकरण, वेदांत, न्याय, मीमांसा तथा धर्मशास्त्र जैसे विविध विषयों पर दो पक्षों के बीच तर्कपूर्ण व प्रभावशाली संवाद हुआ। कुलपति ने सहभागियों को दिए प्रमाण पत्र प्रतिभागियों में शिवराम दास, हरिओम, अजीत दुबे, सुदर्शन भट्टराई, संविदा कुमारी (व्याकरण), अवधेश शुक्ल, हर्ष मिश्र, चैतन्य (वेदांत), शालिनी पांडेय, साक्षी पांडेय (न्याय), सुदर्शन भट्टराई, राजगुरु (मीमांसा), झंटू तिवारी, शिवा त्रिपाठी (धर्मशास्त्र) तथा डॉ. विंटर स्कॉट एवं अंश चाणक्य (दर्शनशास्त्र) को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। यहां विभागाध्यक्ष एवं विद्वान आचार्यों में प्रो. महेन्द्र कुमार पांडेय, प्रो. विजय कुमार पांडेय, डॉ. विल्वेश कुप्पा, डॉ. नितिन आर्य, डॉ. श्रवण दास, आचार्य रवि प्रकाश एवं आचार्य अनुज मिश्र, PRO शशींद्र मिश्र समेत अन्य रहे।
Source: Dainik Bhaskar via DNI News
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