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कानपुर इस्कॉन में गूंजा ‘नरसिंह देव’ का जयकारा:पहली बार दिखा रोबोटिक हाथी, PETA और श्रिया सरन ने सौंपा ‘गजराज
बिठूर रोड स्थित इस्कॉन मंदिर में गुरुवार देर शाम को नरसिंह चतुर्दशी का उत्सव बेहद खास रहा। भगवान के प्राकट्य उत्सव के साथ-साथ यहाँ शहर का पहला ‘यांत्रिक हाथी’ यानी रोबोटिक गजराज आकर्षण का केंद्र बना। जीव दया का संदेश देते हुए मंदिर प्रबंधन ने अब उत्सवों में असली हाथी की जगह इस मशीनी हाथी के उपयोग का निर्णय लिया है, जो आधुनिकता और परंपरा का एक अनोखा संगम है। भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए प्रकट हुए प्रभु नरसिंह चतुर्दशी के मौके पर सुबह 8 बजे से ही मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। कथा सत्र के दौरान भक्तों को भगवान के अवतार की महिमा बताई गई। विद्वानों ने चर्चा की कि कैसे भगवान कृष्ण ने अपने अनन्य भक्त प्रहलाद की रक्षा और अधर्म के प्रतीक हिरण्यकश्यप के अंत के लिए आधा शेर और आधा मनुष्य का अवतार लिया था। तीन दिनों से चल रहे इस विशेष सत्र में श्रद्धालुओं ने नरसिंह देव के उग्र स्वरूप के साथ-साथ उनके करुणामई व्यवहार पर भी चिंतन किया। शाम को हुआ 108 व्यंजनों का भोग और महाअभिषेक चूंकि भगवान नरसिंह का प्राकट्य संध्या काल में हुआ था, इसलिए शाम ढलते ही मंदिर में विशेष रौनक दिखाई दी। शाम 5:30 बजे से ब्रह्म संहिता के मंत्रोच्चार के बीच भगवान का भव्य अभिषेक शुरू हुआ। इसके बाद शाम 6:30 बजे प्रभु को 108 प्रकार के व्यंजनों का छप्पन भोग अर्पित किया गया। महाआरती के दौरान जब झांझ-मंजीरे बजे तो पूरा मंदिर परिसर ‘नरसिंह देव’ के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने पूरे उत्साह के साथ भगवान के इस विशेष रूप का स्मरण किया।
Source: Dainik Bhaskar via DNI News
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