कनाडा में पंजाबियों को झटका:सर्विस सेक्टर वर्कर्स को नहीं मिलेगी PR; कंसलटेंट पर सख्ती, ₹9 करोड़ जुर्माना, 12 महीने तक जेल भी


                 कनाडा में पंजाबियों को झटका:सर्विस सेक्टर वर्कर्स को नहीं मिलेगी PR; कंसलटेंट पर सख्ती, ₹9 करोड़ जुर्माना, 12 महीने तक जेल भी

कनाडा में पंजाबियों को झटका:सर्विस सेक्टर वर्कर्स को नहीं मिलेगी PR; कंसलटेंट पर सख्ती, ₹9 करोड़ जुर्माना, 12 महीने तक जेल भी

कनाडा सरकार ने इमिग्रेशन और सिटीजनशिप कंसलटेंट्स की निगरानी के साथ परमानेंट रेजिडेंस (PR) को लेकर के लिए बड़े बदलाव की घोषणा की है। कनाडा में अगर कोई कंसलटेंट किसी को ठगता है तो इसके लिए ठगी के शिकार व्यक्ति को मुआवजा मिलेगा। इस नियम का सबसे बड़ा फायदा कनाडा में रहे पंजाबी समुदाय को होगा। पंजाब के लोग ही कनाडा में कंसलटेंट की ठगी का शिकार होने वाले सबसे ज्यादा हैं। यह नया नियम 15 जुलाई 2026 से पूरी तरह लागू हो जाएगा। जिसमें फ्रॉड करने वाले कंसलटेंट पर 9 करोड़ रुपए तक जुर्माना और 12 महीने तक की जेल भी हो सकती है। वहीं पंजाबी स्टूडेंट्स को कनाडाई सरकार ने एक झटका भी दिया है। कनाडा के कई स्टेट ऐसे हैं जिन्होंने फूड सेक्टर व सर्विस सेक्टर को अपनी प्रायोरिटी लिस्ट से हटा दिया। इससे कनाडा में फूड सेक्टर के साथ-साथ सर्विस सेक्टर में काम करने वाले वर्कर्स व स्टूडेंट्स को परमानेंट रेजिडेंस (PR) स्टेटस मिलने पर संकट गहराता जा रहा है। पहले पढ़ें इमिग्रेशन कंसलटेंट्स पर क्या फैसला… PR नियम बदलने से किन वर्कर्स-स्टूडेंट्स की बढ़ी परेशानी, जानिए.. सबसे ज्यादा पंजाबी स्टूडेंट्स को नुकसान
कनाडा सरकार की इस पॉलिसी का सबसे ज्यादा नुकसान पंजाबी स्टूडेंट्स व वर्कर्स को झेलना पड़ेगा क्योंकि कनाडा में फूड व सर्विस सेक्टर में सबसे ज्यादा पंजाबी काम करते हैं। कनाडा के अलग-अलग राज्यों ने स्टूडेंट्स व वर्कर्स की PR फाइल्स रिजेक्ट करना शुरू कर दिया। कनाडा के नोवा स्कोटिया के हैलिफैक्स स्थित गुरुद्वारा साहिब में कुछ स्टूडेंट्स व वर्कर्स पीआर फाइल्स रिजेक्ट होने के कारण धरने पर बैठे हैं। दरअसल उनका वीजा समाप्त होने वाला है और उन्होंने सरकार के पास पीआर की फाइल लगाई थी जिन्हें सरकार ने रिजेक्ट कर दिया है। स्टूडेंट्स की डिमांड है कि उन्होंने पीआर की फाइल्स तब लगाई थी जब सरकार ने फूड व सर्विस सेक्टर को प्रायोरिटी लिस्ट से बाहर नहीं किया था। उनकी कनाडा व स्टेट सरकार से डिमांड है कि उनकी पीआर फाइल को पुराने नियमों के हिसाब से अप्रूव करें। कनाडा जाने वालों में 70 फीसदी पंजाबी
कनाडा जाने वाले भारतीयों में पंजाबियों की संख्या सबसे अधिक है। हालिया आंकड़ों के अनुसार फर्जी ऑफर लेटर और जाली दस्तावेजों के कारण जिन हजारों छात्रों पर डिपोर्टेशन का खतरा मंडरा रहा है, उनमें से करीब 60 से 70 प्रतिशत युवा अकेले पंजाब के जालंधर, लुधियाना और अमृतसर जैसे शहरों से हैं। ये परिवार अक्सर अपनी जमीन बेचकर या भारी कर्ज लेकर 15 से 25 लाख रुपए तक इन कंसलटेंट्स को दे देते हैं, जिनका कोई कानूनी रिकॉर्ड नहीं होता। यही कारण है कि 15 जुलाई 2026 से लागू होने वाले नए नियम और मुआवजा फंड पंजाब के परिवारों के लिए संजीवनी साबित होंगे। भारत में भी इमीग्रेशन नियम सख्त भारत में भी इमीग्रेशन को लेकर नियम सख्त है अगर कोई विजा कंसलटेंट या एजेंट फेक लेटर देता है या फेक वीजा लगवाता है तो उसका लाइसेंस रद्द करने का प्रावधान है। भारत में हर राज्य के जिले में डीसी के पास किसी भी कंसलटेंट एजेंसी का लाइसेंस रद्द करने की पावर है। डिप्टी कमिश्नर की किसी भी कंसलटेंट को लाइसेंस प्रदान करता है और वही उसे रद्द कर सकता है। हालांकि, अगर कोई कंसलटेंट किसी के साथ ठगी करता है तो भारत सरकार की ओर से मुआवजा दिलाने का कोई प्रावधान नहीं है।


Source: Dainik Bhaskar via DNI News

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