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अयोध्या में बदला रामलला का भोग:सत्तू-छाछ और ठंडे फल अर्पित किए जा रहे, गर्मी से बचाव के लिए लिया निर्णय
राम मंदिर में विराजमान बाल स्वरूप रामलला के भोग में बदलाव किया गया है। अब उनके दैनिक भोग में चने का सत्तू, छाछ और ठंडी तासीर वाले मौसमी फलों को शामिल किया गया है। भोग में खीरा, ककड़ी, तरबूज, खरबूजा और संतरे के रस का भी उपयोग शुरू कर दिया गया है। मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव ने बताया कि मेष संक्रांति को सतुआ संक्रांति भी कहा जाता है। इस मौसम में सत्तू शरीर को ठंडक देने के साथ पाचन को बेहतर बनाए रखता है। इसी वजह से पूरे महीने रामलला के भोग में सत्तू और छाछ प्रमुख रूप से शामिल रहेंगे। गर्भगृह में ठंडक बनाये रखने के लिए विशेष इंतजाम बढ़ती गर्मी को देखते हुए गर्भगृह में तापमान नियंत्रित रखने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। हालांकि तकनीकी कारणों से यहां एयर कंडीशनर नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि पानी निकासी की व्यवस्था नहीं है। व्हील चेयर से गर्भगृह तक दर्शन की सुविधा राम मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए गर्भगृह के सामने तक व्हील चेयर से पहुंचने की अनुमति दी गई है। ट्रस्ट की पंजीकृत व्हील चेयर से प्रतिदिन करीब 1200 से 1500 श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं। गोपाल राव ने बताया कि भारी भीड़ के कारण सभी श्रद्धालुओं को लिफ्ट सुविधा देना संभव नहीं है। ऐसे में अपील की गई है कि वही श्रद्धालु राम परिवार के दर्शन के लिए आगे बढ़ें, जो सीढ़ियां चढ़ने-उतरने में सक्षम हों।
Source: Dainik Bhaskar via DNI News
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