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65 लाख रुपये कीमत लगी, विधायक के पास चाबी रही:मेरठ में जिस मकान को लेकर विवाद उसे हिंदु ने नहीं खरीदा, मुसलमान को बेचा

मेरठ में पिछले दो दिनों से एक मकान हंगामे की वजह बन गया है। हंगामा भी ऐसा कि पुलिस प्रशासन तक को दखल देना पड़ा। एक मकान को बेचने का विरोध हो रहा है। हिंदू संगठन इसका खुलकर विरोध कर रहा है। मकान बेचने वाला शहर से चला गया है। खरीदने वाला परिवार वहां रह नहीं पा रहा है। विवाद के बाद उसकी तबीयत भी खराब हो गई। उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। यह पूरा मामला यहां के थापरनगर इलाके का है। जहां कभी नरेश कालरा परिवार के साथ रहते थे। कुछ माह पूर्व उन्होंने अपने मकान को बेचने की कवायद शुरू की और तीन दिन पहले उसे मुस्लिम समुदाय के सईद अहमद को सेल कर दिया। इसी के बाद से विवाद शुरू हो गया। विरोध यही है कि हिंदू ने अपना मकान एक मुस्लिम को क्यों बेच दिया? शुक्रवार शाम से शुरू हुआ विरोध, शनिवार को भी पूरे दिन जारी रहा। प्रशासन के दखल के बाद हिंदू संगठन के लोगों ने सदर थाना से धरना तो खत्म कर लिया, लेकिन 3 दिन में मामले का समाधान निकालने की मांग की है। चेतावनी दी है कि अगर मकान हिंदू परिवार को वापस नहीं किया गया तो अगली बार उसी मकान के बाहर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इस पूरे विवाद को समझने के लिए दैनिक भास्कर की टीम थापर नगर पहुंची। लोगों से बात की। पूरे मामले को करीब से समझने की कोशिश की। लोगों से बात करने पर कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहले यह 4 तस्वीरें देखिए मकान की कीमत 65 लाख लगी, सईद ने डेढ़ करोड़ में खरीदा शहर के उत्तरी पटेल नगर (थापरनगर) का यह दो मंजिला मकान 107.86 वर्ग मीटर में बना है। नरेश कालरा उर्फ पप्पू की पत्नी वीना कालरा और बेटे अनुभव कालरा के नाम था। कुछ महीने पहले मकान को बेचने की प्रक्रिया शुरु हुई। काफी लोगों ने कीमत लगाई, लेकिन सईद अहमद व कालरा परिवार के बीच सहमति बन गई। तभी कुछ लोगों ने विरोध कर दिया और सौदा रूक गया। यह बात सामने आई कि नरेश कालरा अपना मकान कई दिनों से बेचना चाह रहे थे। उन्हें वाजिब कीमत नहीं मिल रही थी। लोग सर्किल रेट से भी कम कीमत लगा रहे थे। 65 लाख रुपये में मकान बेचने को कहा गया था। आखिर में सईद से सौदा शुरू हुआ। कई दौरे की बात के बाद सईद ने यह मकान पहले की लगी कीमत से दोगुनी रकम देने की बात कही। नरेश कालरा के परिवार व सईद अहमद के बीच सहमति बनी और सौदा हो गया। चर्चा है कि सईद अहमद को यह मकान डेढ़ करोड़ से भी ज्यादा में पड़ा। कोई ग्राहक नहीं मिला, विधायक के पास 3 महीने रही चाबी नरेश कालरा को अपना मकान बेचने के लिए काफी जतन करना पड़ा। जब यह तय हुआ कि नरेश कालरा अपना मकान सईद अहमद को बेचेंगे तो विरोध हुआ। मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति को मकान नहीं बेचने की बात कही गई। ऐसे में यह मामला कैंट विधायक अमित अग्रवाल तक पहुंचा। फिर भी कोई समाधान नहीं निकला। फिर तय हुआ कि मकान की चाबी कैंट विधायक को सौंप दी जाए, ताकि वह यह मकान हिंदू परिवार को बिकवाने में मदद करें। इस बीच तीन महीना गुजर गया। कोई हिंदू खरीददार सामने नहीं आया। कुछ लोग आए भी तो उन्होंने कीमत कम लगाया। सौदा तय नहीं हो सका। आखिरकार चाबी वापस कालरा परिवार को मिल गई और उन्होंने सईद अहमद से मकान का सौदा कर लिया। पत्नी अफसाना के नाम से कराई रजिस्ट्री दोनों पक्षों के बीच सौदा तय होने के बाद 26 नवंबर, 2025 को कालरा परिवार ने मकान की रजिस्ट्री की। क्योंकि महिला के नाम से रजिस्ट्री कराने पर स्टाम्प में छूट मिलती है, इसलिए सईद अहमद ने मकान की रजिस्ट्री पत्नी अफसाना के नाम कराई। दस्तावेजों की बात करें तो नरेश कालरा की पत्नी वीना कालरा व बेटे अनुभव कालरा ने मकान की रजिस्ट्री अफसाना के नाम की। जमीन की कीमत एक करोड़ तय हुई, जिसमें 6 प्रतिशत के हिसाब से 6 लाख रुपये के स्टाम्प लगे। एक प्रतिशत की कोर्ट फीस की रसीद लगाकर कुल 7 लाख के स्टाम्प लगे और प्रोपर्टी लगभग 1.52 करोड़ रुपये में पड़ी। सईद ने इस मकान को खरीदने के लिए अपना पुराना मकान बेचा है। बैंक से एक करोड़ रुपए लोन लिया गया है। अब एक नजर मकान की लोकेशन पर सईद अहमद ने जो मकान खरीदा है, वह मोहल्ले के नाले के किनारे है। मकान के एक तरफ हिंदू आबादी है। दूसरी तरफ 15 वर्ष से ऐसे ही एक विवाद के कारण बंद पड़ा मकान और फिर गुरुद्वारा है। यहां से चंद कदम की दूरी पर जली कोठी का इलाका शुरू हो जाता है। कुछ ही दूरी पर पटेल नगर भी है। जलीकोठी व पटेल नगर दोनों ही मुस्लिम बहुल्य इलाके हैं। देखा जाए तो नाले के एक तरफ का पूरा इलाका मुस्लिम बहुल्य तो दूसरी तरफ हिंदू बहुल्य क्षेत्र है। हिंदू खरीददार ना मिलने की यह रहीं कुछ वजह: – मकान एकदम नाले के किनारे है।
– बरसात में नाला ओवर फ्लो होकर जलभराव की स्थिति पैदा कर देता है।
– नाले से दुर्गंध उठती है जो हवा बदलते ही घरों तक पहुंचती है।
– नाले के किनारे सड़क पर ही काफी वाहन खड़े रहते हैं।
– मुस्लिम आबादी की अधिकता भी एक बड़ी वजह है। अब मकान विवाद के दो पक्ष का तर्क पढ़िए… पक्ष 01: कैंट विधायक की मध्यस्था से तय हुआ सौदा मकान खरीदने वाले सईद अहमद के रिश्तेदार बाबा शहजाद बताते हैं कि कुछ महीने पहले नरेश उर्फ पप्पू ने ऐलान किया था कि वह मकान बेचना चाहते हैं। मेरे रिश्तेदार सईद ने इच्छा जताई, लेकिन विरोध हो गया। कैंट विधायक अमित अग्रवाल ने मध्यस्थता की। तय हुआ कि पहला मौका हिंदू खरीददार को मिलेगा। तीन महीने तक चाबी उनके पास रही, लेकिन कोई खरीददार नहीं आया। तब नरेश ने सईद से सौदा किया। अब विरोध हो रहा है, यह गलत है। पक्ष 02: दोनों पक्षों की रजामंदी से सौदा हुआ शाहरुख एडवोकेट का कहना है कि यह सामान्य संपत्ति खरीद का मामला है। अब इसे कुछ लोग विवाद का रूप दे रहे हैं। नरेश कालरा के परिवार को संपत्ति बेचनी थी। उन्होंने काफी इंतजार भी किया, लेकिन जब कोई नहीं मिला तो सईद अहमद को मकान बेच दिया। यह बेचने वाले के अधिकार का मामला है कि वह किसे अपनी संपत्ति बेचेगा। पटेल नगर मिश्रित आबादी वाला इलाका है। उसे हिंदू बहुल्य कहना गलत है। सभी धर्म के लोग उस इलाके में रहते हैं। विपक्ष 01: थापर नगर को मुस्लिम एरिया नहीं बनने देंगे विश्व हिन्दू परिषद के नेता नमन अग्रवाल बताते हैं कि थापर नगर में एक रजिस्टर्ड सोसाइटी है, जिसका मकान हिंदू परिवार ही खरीद सकता है। यह नियम पहले से है, लेकिन मकान मुस्लिम परिवार को बेचा गया है। इस इलाके का हाल भी पास के दूसरे इलाके जैसा हो जाएगा। इसलिए विरोध किया जा रहा है। थापर नगर को पटेल नगर नहीं बनने दिया जाएगा। मुस्लिम समुदाय के लोग महिलाओं से छींटाकशी करते हैं, इसलिए इसे मुस्लिम एरिया नहीं बनने देंगे। व्यापारी नेता सुनील दुआ बताते हैं कि ऐसी ही शुरुआत पटेल नगर में हुई थी। यहां एक हिंदू परिवार अपना मकान मुस्लिम को बेचकर चला गया। इसके बाद वहां हिंदुओं के मकान बिकते चले गए और अब वह मुस्लिम इलाका है। पहले पटेल नगर में हिंदुओं की बड़ी आबादी थी। सोतीगंज भी इसी राह पर है। अब थापर नगर को इसी ओर लेकर जाया जा रहा है जो गलत है। इस तरह पलायन होना गलत है। ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। 15 साल पहले भी हुआ था ऐसा विवाद यह मामला 3 महीने पुराना बताया जा रहा। सिख समुदाय के लोगों को जब पता चला कि सईद अहमद से सौदा चल रहा है, तो उन्होंने कुछ लोगों की मदद से नरेश से संपर्क किया। सतबीर सिंह नाम के व्यक्ति ने खुद मकान खरीदने की पेशकश की। सतबीर का आरोप है कि इसके बावजूद नरेश ने चुपचाप मकान का सौदा सईद से कर दिया। क्षेत्र के लोगों ने बताया कि जिस जगह नरेश का मकान है, उससे 2 मकान छोड़कर एक और मकान है। साल- 2010 में इस मकान के मालिक त्रिलोक चंद ने गुपचुप मकान का सौदा अनीस नाम के व्यक्ति से कर दिया था। तब भी लोगों ने इसका विरोध किया था। पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा था। मामला कोर्ट में चला गया था। तब से कोर्ट में ही पेंडिंग है। मकान खंडहर का रूप ले चुका है, लेकिन मामला खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। ———————— यह खबर भी पढ़िए… मेरठ में मुसलमान को मकान बेचा, हिंदू संगठनों का हंगामा: थाने में हनुमान चालीसा पढ़ी; डेढ़ करोड़ में बेचा था; खरीदार की तबीयत बिगड़ी मेरठ में दूसरे समुदाय के व्यक्ति को मकान बेचने को लेकर कई हिंदू संगठन सड़क पर उतर आए। थाने पर धरना शुरू कर हनुमान चालीसा का पाठ करने लगे। उनका साफ कहना है कि हिंदू परिवारों का पलायन नहीं होने देंगे। उन्होंने मकान वापस दिलाने की मांग की। हिंदू संगठन के लोगों से बात करने एसडीएम और सीओ भी थाने पहुंचे। उनसे पूरी बात सुनी। इसके बाद मकान खरीदने वाले सईद अहमद को थाना बुलाया गया। पत्नी के साथ थाने के लिए घर से निकले सईद की रास्ते में तबीयत बिगड़ गई। वह चक्कर खाकर गिर पड़ा। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। पूरी खबर पढ़िए


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