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‘सिर्फ धर्मग्रंथ नहीं जीवन जीने की कला है गीता’:प्रयागराज में गीता जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित संगोष्ठी में बोले हाईकोर्ट के जस्टिस सुधीर नारायण अग्रवाल

गीता जयंती के एक दिन पूर्व रविवार को को परमार्थ त्रिवेणी पुष्प के द्वारा श्रद्धालुओं की एक बैठक परमार्थ हॉल में हुई। मुख्य अतिथि इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुधीर नारायण अग्रवाल ने कहा कि गीता एक मात्र धर्मग्रंथ ही नहीं जीवन जीने का शैली है, उन्होंने कहा कि गीता भगवान श्री कृष्ण के मुख से प्रकट हुई है। समस्त मानव के कल्याण, उद्धार के लिए अर्जुन को निमित बनाकर भगवान श्री कृष्ण ने इसमें अर्जुन को कर्म, ज्ञान वैराग्य,भक्ति का उपदेश दिया है। जिसे अपने जीवन में उतारने से असंख्य जीवों का उद्धार हुआ। जस्टिस ने कहा कि गीता जीवन की समस्याओं को दूर करता है। परमार्थ त्रिवेणी पुष्प के ऋषि कुमार के द्वारा गीता का पूजा और 15वां अध्याय पुरुषोत्तम योग का पठन किया गया। परमार्थ त्रिवेणी पुष्प के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अरुण सारस्वत के दिशा निर्देश में यह कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस मौके पर परेश दवे, संतोष पांडेय, आचार्य सुभाष चमोली आदि उपस्थित थे।


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