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सहारनपुर हादसा- बच्चे की खोपड़ी चकनाचूर, 6 की पसलियां टूटीं:पूरे शरीर में घुसी थी बजरी; पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देखकर डॉक्टर भी हैरान

सहारनपुर में 28 नवंबर को हुए हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई। हादसा दिल्ली-देहरादून हाईवे पर बजरी लदे ओवरलोड डंपर कार पर पलटने से हुआ। हादसा इतना भयावह था कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देखकर डॉक्टर भी सन्न रह गए। 3 घंटे चले पोस्टमॉर्टम में पता चला कि 40-50 टन वजन वाले डंपर ने कार को पूरी तरह कुचल दिया था। सामान्य रूप से करीब 7 फीट ऊंची कार दबकर सिर्फ 3 फीट की रह गई थी। कार का पूरा ऊपरी हिस्सा चपटा हो चुका था। दैनिक भास्कर ने ग्राउंड जीरो पर पूरे मामले की पड़ताल की। पोस्टमॉर्टम में क्या निकला? हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहले पढ़िए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में क्या निकला 4 साल के बच्चे की खोपड़ी चकनाचूर हुई
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, चार साल के अनिरुद्ध उर्फ नन्नू की खोपड़ी पूरी तरह चकनाचूर हो गई। बाकी 6 लोगों की पसलियां टूटकर सीधे उनके लीवर, फेफड़ों और दूसरे अंगों में धंस गई थीं। इससे उनके ऑर्गन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। सभी के मुंह, नाक और कान में बजरी भरी मिली। डॉक्टरों ने कहा कि इतनी क्रशिंग एनर्जी वाले हादसे बेहद दुर्लभ होते हैं। किसी को एक सेकेंड का भी मौका नहीं मिला। इस दर्दनाक घटना ने साफ कर दिया है कि सिस्टम की एक नहीं, बल्कि तीन बड़ी विफलताएं थीं। तेज रफ्तार और ओवरलोड डंपर, पुलिस की ढीली निगरानी और एनएचएआई की गैरजिम्मेदाराना व्यवस्था। इन तीनों की लापरवाही के बीच एक परिवार घर से निकला था। कुछ ही मिनटों बाद सातों की लाशें पिचकी कार में पड़ी थीं। अब जानिए कौन थे हादसे के जिम्मेदार पहला जिम्मेदार- हादसे के लिए सबसे बड़ा जिम्मेदार डंपर चालक बताया जा रहा। प्रत्यक्षदर्शी दीपेंद्र, घनश्याम और सुधीर का कहना है कि डंपर की रफ्तार बहुत ज्यादा थी। अगर ड्राइवर स्पीड कम रखता तो ब्रेक लगाकर वाहन को कंट्रोल किया जा सकता था। लेकिन, तेज स्पीड से वह नियंत्रण खो बैठा और इतना बड़ा हादसा हो गया। दूसरा जिम्मेदार- पुलिस-प्रशासन को माना जा रहा। ओवरलोड डंपरों के खिलाफ अभियान तो चलाया जा रहा, लेकिन असर न के बराबर है। प्रत्यक्षदर्शी राजपाल और देवेंद्र ने बताया कि ओवरलोड होने की वजह से ही डंपर बेकाबू होकर कार पर पलट गया। जब कार के ऊपर से बजरी हटाई गई तो हर कोई दंग रह गया। करीब पांच फीट ऊंची कार दबकर सिर्फ दो से तीन फीट रह गई थी। अंदर सातों शव खून से लथपथ पड़े थे। बड़ा सवाल यह है कि जब ओवरलोडिंग पर कार्रवाई हो रही, तो इतना भारी वाहन पुलिस की नजरों से कैसे निकल गया? तीसरा जिम्मेदार- एनएचएआई को माना जा रहा। क्योंकि, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का यह हिस्सा काफी हद तक पूरा होने के बावजूद अव्यवस्थित है। गागलहड़ी से बिहारीगढ़ तक बने 9 ओवरब्रिज कभी खोल दिए जाते हैं, तो कभी मरम्मत का हवाला देकर बंद कर दिए जाते हैं। फिलहाल कई ओवरब्रिज बंद हैं, जिससे वाहनों को सर्विस रोड से निकाला जा रहा। अगर ओवरब्रिज खुला होता तो डंपर सर्विस रोड पर न आता। हादसे के बाद एनएचएआई की कार्यशैली पर इसलिए सवाल उठ रहे हैं कि घटना के तुरंत बाद उसी ओवरब्रिज को खोल दिया गया। अगर वहां मरम्मत जारी थी, तो हादसे के तुरंत बाद उसे कैसे खोल दिया गया? अब सिलसिलेवार तरीके से पूरा मामला समझिए… यूपी के सहारनपुर में शुक्रवार को एक डंपर बेकाबू होकर कार पर पलट गया। डंपर पर लदी बजरी भी कार पर गिर गई। इस हादसे में 4 साल के बच्चे समेत 7 लोगों की मौत हो गई। हादसा इतना भीषण था कि पूरी कार डंपर और बजरी के नीचे दब गई। बाद में डंपर को 3 क्रेन की मदद से किनारे किया गया। जबकि, बजरी हटाने में लोगों को घंटों मशक्कत करनी पड़ी। तब तक कार सवार तड़पते रहे। बाद में कार की छत काटकर उसमें फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। बताया जा रहा है, परिवार अंतिम संस्कार में शामिल होने सैयद माजरा गांव से सहारनपुर के गंगोह जा रहा था। कार में एक ही परिवार के 7 लोग सवार थे। हादसे के बाद डंपर चालक मौके से भाग गया। एसपी सिटी व्योम बिंदल ने बताया कि 7 लाशें कार से निकाली गईं। गांव के बाहर ही हादसा
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे पर शुक्रवार सुबह सवा 9 बजे सहारनपुर के सैयद माजरा गांव का रहने वाला परिवार कार से निकला था। कार गांव के बाहर एक्सप्रेस-वे पर पहुंची ही थी कि देहरादून की तरफ से आ रहा तेज रफ्तार डंपर उस पर पलट गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कार अचानक डंपर के सामने आ गई। डंपर चालक ने ब्रेक लगाए, लेकिन रफ्तार तेज होने की वजह से वह गाड़ी संभाल नहीं पाया। हादसा इतना भीषण था कि कार पूरी तरह पिचक गई। परिवार उसके अंदर ही फंस गया। परिवार के 7 लोगों की मौत, एक की शिनाख्त
सैयद माजरा में महेंद्र सैनी रहते हैं। उनके 2 बेटे थे- बड़ा प्रदीप और छोटा संदीप। प्रदीप की शादी हो चुकी है। जबकि, संदीप फार्मासिस्ट था। वह पूर्व मंत्री डॉ. धर्म सिंह सैनी के भाई करण सिंह के हॉस्पिटल में मेडिकल स्टोर चलाता था। महेंद्र ने बताया कि गुरुवार को गंगोह में रहने वाले उनके साले की तबीयत खराब हो गई थी। हालत ज्यादा सीरियस हालत होने पर दोनों बेटे प्रदीप और संदीप कार से मामा से मिलने गए थे। इसी बीच मामा की मौत हो गई। इस पर प्रदीप वहीं रुक गया। जबकि, संदीप कार से घर आ गया। शुक्रवार सुबह मामा के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए महेंद्र का बेटा संदीप (24), उनकी पत्नी रानी देवी, बेटी जूली (27), नाती अनिरुद्ध (4), महेंद्र का दामाद शेखर कुमार (28), महेंद्र की साली का बेटा मोहद्दीपुर निवासी विपिन (20) और रिश्तेदार उमेश सैनी (45) कार से जा रहे थे। इसी बीच हादसा हो गया। हालांकि, हादसे के बाद भी संदीप की सांसें चल रही थीं। अस्पताल पहुंचने के बाद उसकी मौत हो गई। ————- ये खबर भी पढ़िए सहारनपुर में मां-बेटा, बेटी-दामाद समेत 7 की मौत:अंतिम संस्कार में जा रहे थे, बजरी लदा डंपर पलटा; कार पिचककर 2 फीट रह गई यूपी के सहारनपुर में शुक्रवार को एक डंपर बेकाबू होकर कार पर पलट गया। डंपर पर लदी बजरी भी कार पर गिर गई। इस हादसे में 4 साल के बच्चे समेत 7 लोगों की मौत हो गई। डंपर में बजरी भरी थी। रफ्तार तेज होने की वजह से डंपर बेकाबू हो गया। हादसा इतना भीषण था कि पूरी कार डंपर और बजरी के नीचे दब गई। 5 फीट की कार 2 फीट की बची। बाद में डंपर को 3 क्रेन की मदद से किनारे किया गया। जबकि, बजरी हटाने में लोगों को घंटों मशक्कत करनी पड़ी। तब तक कार सवार तड़पते रहे। बाद में कार की छत काटकर उसमें फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। बताया जा रहा है, परिवार अंतिम संस्कार में शामिल होने सैयद माजरा गांव से सहारनपुर के गंगोह जा रहा था। कार में एक ही परिवार के 7 लोग सवार थे। हादसे के बाद डंपर चालक मौके से भाग गया। एसपी सिटी व्योम बिंदल ने बताया कि 7 लाशें कार से निकाली गई हैं। उन्हें पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेजा गया। मामला थाना गागलहेडी का है। पूरी खबर पढ़िए


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