देशभर में मतदाता सूची सत्यापन के दौरान अत्यधिक सरकारी दबाव के साथ असामान्य कार्यशैली और मानसिक प्रताड़ना के कारण अब तक 25 से अधिक बूथ स्तर अधिकारियों (बीएलओ) की मौतों को आम आदमी पार्टी ने गंभीर संवैधानिक संकट बताया है। इन्हीं घटनाओं के विरोध में और दिवंगत अधिकारियों को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश के प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने रविवार को प्रयागराज के सुभाष चौराहे पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया, जिसमें बड़ी संख्या में आप कार्यकर्ता मौजूद रहे। संजय सिंह ने कहा कि यह सिर्फ श्रद्धांजलि सभा नहीं, बल्कि सरकार और चुनाव आयोग की “तानाशाही और अमानवीयता” के खिलाफ आवाज उठाने का मंच है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची सत्यापन के नाम पर देशभर में बीएलओ पर इतने असहनीय दबाव डाले जा रहे हैं कि कई अधिकारी तनाव, अपमान और भय के कारण अपनी जान गंवाने को मजबूर हुए। उन्होंने फतेहपुर में एक लेखपाल की दबाव में मौत, लखनऊ में विजय कुमार वर्मा की ब्रेन हेमरेज से हुई मृत्यु और गोंडा में एक लेखपाल द्वारा ज़हर खाकर जान देने की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं ने व्यवस्था की क्रूरता को उजागर कर दिया है। आप सांसद ने कहा कि भाजपा “चुनावी तानाशाही” के चरम पर पहुंच चुकी है और ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार अपने राजनीतिक फायदे के लिए कर्मचारियों की ज़िंदगी को दांव पर लगा रही है। उन्होंने सवाल किया कि जब यूपी में चुनाव डेढ़ साल बाद हैं तो फिर एक महीने में सारे रिकॉर्ड मांगने की क्या जल्दबाज़ी है। संजय सिंह ने आगे आरोप लगाया कि प्रदेश में 180 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की बर्खास्तगी और वाराणसी में 33 सफाईकर्मियों के निलंबन जैसी कार्रवाइयां सरकार की दमनकारी नीतियों का उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि 25 से अधिक बीएलओ की मौतें आत्महत्या नहीं बल्कि “योजनाबद्ध हत्या” हैं और इसके लिए मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए। साथ ही मोदी और योगी सरकारों को जिम्मेदार ठहराने की मांग की।
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