लखनऊ में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में 10 दिवसीय खादी महोत्सव चल रहा है। इसका क्रेज यूथ में भी खूब है। वे जमकर खरीदारी कर रहे हैं। दुकानदारों ने बताया है कि यूथ खादी के कपड़ों को काफी पसंद कर रहे हैं। वे मान रहे हैं कि खादी में भी फैशनेबल और बाजार से सस्ते कपड़े मिल रहे हैं। स्टॉल लगाए बुनकरों ने बताया कि लोगों की पसंद बढ़ने के साथ उनकी आमदनी 2 से 3 गुना बढ़ गई है। मांग बढ़ी है लेकिन उसकी भरपाई करने में इलेक्ट्रिक चरखे खासा काम आ रहे हैं। अब दोगुने से भी ज्यादा स्पीड में कताई का काम कर पा रहे हैं। महोत्सव 30 नवंबर तक चलेगा। दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने महोत्सव पहुंचकर दुकानदारों और आने वाले लोगों से बातचीत की। पढ़िए यह रिपोर्ट… 5 तस्वीरें देखिए… अब पढ़िए दुकानदारों-बुनकरों ने जो कहा… हाथोंहाथ कपड़ा बनवाकर लीजिए इलेक्ट्रिक चरखे सूत कात रही सुनीता मिलीं। उन्होंने बताया- पहले लकड़ी का चरखा चलाते थे, काफी मेहनत और समय लगता था। पूरे महीने 12 घंटे काम करने के बाद बहुत मुश्किल से ₹10000 ही कमा पाते थे। लेकिन, जब से इलेक्ट्रिक चरखा आया है, 8 घंटे काम करके 20 हजार से 30 हजार रुपए आराम से कमा लेते हैं। सुनीता 20 साल से सूत कात रही हैं। वे लोगों को हाथोंहाथ कपड़ा बनाकर दे रही हैं। युवाओं में खादी का क्रेज बढ़ रहा कानपुर के हस्तशिल्प कारीगर धीरेंद्र द्विवेदी ने बताया- खादी महोत्सव से काफी लाभ मिल रहा है। दुकान निशुल्क उपलब्ध कराई गई हैं। खादी ग्राम उद्योग बोर्ड से हर तरह से सहायता मिल रही है। हम लोग डिजाइनिंग खादी पर काम करते हैं। इसमें एनआईएफटी की डिजाइनिंग के कपड़े हैं। आधुनिक डिजाइन और फैशन के हिसाब से कपड़े तैयार कर रहे हैं। युवा इन्हें काफी पसंद कर रहे हैं। पारंपरिक से हटकर खादी भी फैशन पर आया खादी में एक बड़ा बदलाव आया है। अब इसके कपड़े पुराने ट्रेडिशनल कुर्ता पजामा से हटकर लोगों की जरूरत फैशन और सुविधा के हिसाब से उपलब्ध हैं। विदेशी लोगों में खादी के कपड़े काफी प्रसिद्ध हैं। हमारे एयरपोर्ट पर आउटलेट हैं, वहां विदेशी खादी के कपड़ों की खूब खरीदारी करते हैं। हैंडमेड कपड़ा होने की वजह से इसकी कीमत थोड़ी ज्यादा होती है। फिलहाल खादी के कपड़े 150 रुपए से लेकर ₹4000 तक की रेंज में उपलब्ध हैं। लगभग 500 लोग हमारे साथ जुड़े हुए हैं जो खादी के माध्यम से रोजगार पा रहे हैं। ग्राहक बोले- खादी से ज्यादा कंफर्टेबल कुछ भी नहीं महोत्सव घूमने आए अवधेश प्रताप ने कहा- खादी से ज्यादा कंफर्टेबल कुछ भी नहीं। विगत 35 सालों से लगातार और हर मौसम में खादी के कपड़े ही इस्तेमाल करता हूं। खादी का हमारे शरीर पर कोई बुरा असर नहीं होता है। शरीर के लिए बेहद आरामदायक कपड़ा है। बदलते समय के साथ खादी मोटे और पतले दोनों धागे में आने लगा। इसमें भी शर्ट, सदरी समेत तमाम तरीके के फैशनेबल और डिजाइन वाले कपड़े आ रहे हैं। महिलाओं के भी अच्छे वैराइटी है जिस वजह से मार्केट में काफी चर्चित हो गया है। नीम की कंघी हेयर फॉल रोकने में मददगार लकड़ी कारीगर राकेश शुक्ला ने बताया- यह महोत्सव लघु उद्योग, छोटे व्यापारियों के लिए बेहद मुनाफे वाला है। हम नीम की कंघी तैयार करते हैं जो बालों के लिए लाभदायक है। प्लास्टिक की कंघी से बालों से संबंधित बीमारियां होती हैं। इसी समस्या को देखते हुए हमने नीम की कंघी तैयार की है। यह 150 रुपए से लेकर 1000 रुपए तक में उपलब्ध है। महोत्सव में स्वदेशी उत्पादों की प्रदर्शनी महोत्सव में 160 से अधिक उद्यमियों-कारीगरों ने स्टॉल लगाए हैं। यहां हस्तशिल्प, स्वदेशी तकनीक के साथ ही आधुनिक मशीन की मदद से हो रही कपड़ों की बुनाई की बारीकियों के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। खादी कपड़ों के अलावा, बनारसी साड़ी, उत्तराखंड की टोपी, नीम की लकड़ी की बनी हुई कंघी, वुलेन शॉल, शूट और अन्य कपड़ों के स्टॉल लगाए गए हैं। महोत्सव में बिकने वाले ज्यादातर सामान स्वदेशी हैं। अंत में फिर से 3 तस्वीरें देखिए… ———————– ये खबर भी पढ़िए… अखिलेश यादव ने SIR फॉर्म भरा, पार्टी नेता विरोध में : लखनऊ में होर्डिंग, नोटबंदी से जोड़ा; कहा- BJP सरकार जनता पर फैसले थोप रही अखिलेश यादव के SIR फॉर्म भरने की अगली ही रात सपा नेताओं ने लखनऊ में SIR प्रक्रिया का विरोध कर दिया है। सपा नेता मोहम्मद इखलाक ने प्रदेश कार्यालय के बाहर एक होर्डिंग लगा दिया है। इसमें SIR का जिक्र करते हुए लिखा है- बीजेपी सरकार के हर बड़े फैसले की कीमत जनता ने जान देकर चुकाई। (पूरी खबर पढ़िए)
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