मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के आर्थोपेडिक डिपार्टमेंट के HOD डॉ. विक्रम निगम को परिनिंदा का दंड दिए जाने का आदेश डिप्टी सीएम व स्वास्थ्य ब्रजेश पाठक ने दिया है। दरअसल, स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल में विभाग के डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित कराए जाने में लापरवाही के मामले में उन्होंने यह आदेश दिया है। उन्होंने लिखा कि ओपीडी में मरीजों को परामर्श व इलाज के लिए चिकित्सकों की उपस्थिति सुनिश्चित कराये जाने में लापरवाही पायी गई है। ऐसे में उनके खिलाफ परिनिंदा का दंड दिये जाने के आदेश जारी किया है। दरअसल, ब्रजेश पाठक खुद पिछले महीने स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचे थे। उसी समय ओपीडी में डॉक्टरों के समय से न पहुंचने का मामला उठा था। उधर, डॉ. विक्रम निगम ने कहा, पिछले दिनों कोर्ट के आदेश पर एक कमेटी लखनऊ से आई थी, उसमें कुछ डॉक्टरों की अनुपस्थिति के चलते शायद ऐसा हुआ है। मौजूदा समय में विभाग के सभी डॉक्टर समय से ओपीडी में बैठते हैं। जानिए, क्या है परिनिंदा का दंड दरअसल, परिनिंदा का दंड दिए जाने का आशय यह है कि कर्मचारी को नाम मात्र या औपचारिक दंड दिया जाता है। किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ दोष साबित होने पर उसे दिया जाने वाला एक प्रकार का अनुशासनात्मक दंड होता है। लेकिन इसे संगीन अपराध नहीं माना जाता है। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारी या कर्मचारी को स्पष्टीकरण का मौका दिया जाता है और बाद में उस पर परिनिंदा का दंड लगाया जाता है। इसमें उसके पदोन्नति पर तत्काल असर नहीं पड़ेगा। समय से नहीं OPD में नहीं पहुंचते हैं कुछ डॉक्टर्स पिछले दिनों इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल पर सख्त टिप्पणी करते हुए कड़ा रूख अपनाया था। स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारियों से लेकर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य, अस्पताल के एसआईसी, सीएमओ आदि को कोर्ट में तलब किया गया था। इसके बाद प्रमुख सचिव को खुद अस्पताल का निरीक्षण करने के लिए आना पड़ा था। जिलाधिकारी की ओर से कई टीमों को लगा दिया गया था जो प्रतिदिन सुबह सुबह ही ओपीडी में जाकर डॉक्टरों की उपस्थिति चेक करते थे। उस समय तो इस लापरवाही में कुछ हद तक सुधार हो गया था लेकिन अब स्थिति ऐसी है कि कुछ बड़े डॉक्टर्स ओपीडी में अभी भी समय से नहीं पहुंच पा रहे हैं।
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