लखनऊ के श्रीरामलीला पार्क, सेक्टर ‘ए’ सीतापुर रोड योजना कॉलोनी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार को भक्ति और आध्यात्मिकता का अद्भुत समागम देखने को मिला। यह कथा विश्वनाथ मंदिर के 34वें स्थापना दिवस समारोह के अंतर्गत आयोजित की जा रही है। पंडाल श्रद्धालुओं की भीड़ से खचाखच भरा रहा और हर तरफ प्रभु के जयघोष सुनाई दिए। कथाव्यास आचार्य पं. गोविंद मिश्रा ने ध्रुव चरित्र और भगवान कपिल के जन्म प्रसंग का दिव्य वर्णन किया, जिससे भक्त भाव-विभोर हो गए। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि ध्रुव की अटूट साधना और कपिल भगवान का ज्ञान आज के समाज के लिए आवश्यक है। बच्चों में संस्कार समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव आचार्य मिश्रा ने बढ़ती प्रतिस्पर्धा, तनाव और पारिवारिक मूल्यों में गिरावट पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने जोर दिया कि बच्चों में संस्कार, श्रद्धा और नैतिकता का संवर्धन हर परिवार की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए, तभी समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है और जीवन सार्थक बनता है। इसी क्रम में शिव–पार्वती विवाह का पावन प्रसंग सुनाया गया, जिससे पूरा पंडाल भक्तिमय हो उठा। कथाव्यास ने बताया कि शिव–पार्वती विवाह केवल एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि त्याग, धैर्य, समर्पण और दिव्यता का संदेश है। उन्होंने कहा कि प्रेम तभी सफल होता है जब उसमें विश्वास के साथ आदर और संयम हो। पार्वती विवाह की झांकी कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण यह विवाह दो संस्कृतियों, विचारों और परंपराओं के संगम का प्रतीक है, जो जीवन की कठिनाइयों को भी सहज बना देता है।कथा के साथ-साथ कलाकारों द्वारा प्रस्तुत शिव–पार्वती विवाह की भव्य झांकी कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही। दिव्य प्रकाश, पारंपरिक संगीत, नृत्य और आकर्षक वेशभूषा ने सभी का मन मोह लिया। मंच पर झांकी के आते ही पंडाल ‘हर हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारों से गूंज उठा, और भक्त भक्ति रस में लीन होकर झूमते नजर आए।
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