प्रयागराज स्थित उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) में इस वर्ष 1 दिसंबर से 32वां राष्ट्रीय शिल्प मेला शुरू होने जा रहा है। यह दस दिवसीय मेला हर साल देशभर की हस्तशिल्प कला, संस्कृति और खानपान को एक मंच पर लाने के लिए आयोजित किया जाता है। इस बार मेले में कई खास बदलाव किए गए हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण है प्रवेश शुल्क में बढ़ोतरी। एनसीजेडसीसी ने एक व्यक्ति के लिए प्रवेश शुल्क 10 रुपए से बढ़ाकर 30 रुपए कर दिया है, जो आम जनता पर असर डाल सकता है। मेले में 156 स्टॉल लगाए जाएंगे, जिनमें से 129 स्टॉल उत्कृष्ट शिल्प उत्पादों के होंगे, जबकि 27 स्टॉल विभिन्न राज्यों के पारंपरिक और जायकेदार व्यंजनों का आनंद देने के लिए तैयार हैं। इस वर्ष के मेले में कर्नाटक के सिल्क सूट, मध्य प्रदेश की हैंड एंब्रॉयडरी, यूपी, बिहार और झारखंड के सिल्क वस्त्र और शॉल, जयपुरी रजाइयां, राजस्थान की स्टोन कार्विंग, मुरादाबाद के पीतल के बर्तन, और पंजाब की फुलकारी जैसे शिल्प और हस्तकला के अद्भुत उत्पाद देखने को मिलेंगे। इसके अलावा, कई प्रदेशों के चर्म शिल्प, चटाई, ड्राई फ्लावर और चादरें भी मेले का हिस्सा बनेंगी। मेले में हर दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें पद्मश्री मालिनी अवस्थी, गजल गायक भूपेंद्र शुक्ला और कव्वाल युसूफ निजामी अपनी प्रस्तुतियां देंगे। विशेष रूप से थर्ड जेंडर कलाकारों के भी प्रदर्शन होंगे, जो इस बार के मेले को और भी खास बनाएंगे। मेले के उद्घाटन से पहले, 1 दिसंबर को कलाकारों की शोभायात्रा निकाली जाएगी, जो एनसीजेडसीसी परिसर से शुरू होकर सुभाष चौराहे पर समाप्त होगी। इस यात्रा में व्यापार मंडल द्वारा कलाकारों का स्वागत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, एनसीजेडसीसी ने प्रतिभा खोज कार्यक्रम भी शुरू किया है, जिसमें गायन और वादन के शौकीनों को खुले मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन करने का मौका मिलेगा। इस बार मेला पूरी तरह से पॉलिथीन फ्री रहेगा, और एनसीजेडसीसी ने लोगों से अपील की है कि वे अपने साथ थैला लाकर पॉलिथीन का इस्तेमाल न करें।
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