देवरिया के बरहज निवासी पूर्व राज्यमंत्री और लोकतंत्र रक्षक सेनानी गोरख प्रसाद निषाद का शुक्रवार रात निधन हो गया। उन्होंने लखनऊ के डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल में अंतिम सांस ली। वह 82 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। सदर विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी सहित कई जनप्रतिनिधियों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनके निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की है। गोरख प्रसाद निषाद का जन्म 15 जुलाई 1943 को बरहज में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बरहज में और उच्च शिक्षा गोरखपुर में पूरी की। अध्ययन के बाद, उन्होंने बरहज स्थित बाबा गयादास इंटर कॉलेज में अध्यापक के रूप में कार्य किया। यहीं से उनका सामाजिक सरोकार बढ़ा और वे धीरे-धीरे राजनीति की ओर अग्रसर हुए, जनसंघ से जुड़कर सक्रिय भूमिका निभाने लगे। देश में आपातकाल लागू होने पर उन्होंने इसका खुलकर विरोध किया। इसके परिणामस्वरूप, वर्ष 1976 में उन्हें गिरफ्तार कर लगभग दो माह तक जेल में रखा गया। बाद में भाजपा के गठन के पश्चात उन्होंने संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और लगातार सक्रिय रहे। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में भी उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिसके लिए उन्हें एक बार फिर जेल जाना पड़ा। उनकी राजनीतिक प्रतिबद्धता और संगठनात्मक निष्ठा को देखते हुए, 1997 में प्रदेश में भाजपा सरकार बनने पर उन्हें विधान परिषद का सदस्य बनाया गया। इसके बाद, कल्याण सिंह मंत्रिमंडल में उन्हें पशुधन, मत्स्य एवं श्रम राज्य मंत्री का दायित्व सौंपा गया। गोरख प्रसाद निषाद के निधन से जिले की राजनीति, भाजपा संगठन और सामाजिक जीवन को गहरी क्षति हुई है। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए बरहज लाया जाएगा, जहां राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किए जाने की संभावना है।
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