देवरिया के इजरही गांव में एक शादी के मठकोड़वा कार्यक्रम में जेसीबी मशीन का उपयोग किया गया। इस अनोखी रस्म ने पूरे क्षेत्र में लोगों का ध्यान आकर्षित किया और चर्चा का विषय बन गई। यह कार्यक्रम शनिवार शाम को गांव निवासी शिब्बू गुप्ता और उमेश गुप्ता के परिवार में आयोजित किया गया था। यह रस्म गोरखपुर के विकास गुप्ता के साथ तय हुए रिश्ते के बाद निभाई गई। परंपरागत रूप से फावड़े और कुदाल से की जाने वाली मिट्टी कोड़ने की यह रस्म इस बार बिल्कुल अलग अंदाज में पूरी की गई। परिवार ने इसे खास और यादगार बनाने के लिए जेसीबी मशीन का इस्तेमाल किया। जैसे ही जेसीबी से मिट्टी कोड़ने का काम शुरू हुआ, बड़ी संख्या में ग्रामीण इसे देखने के लिए मौके पर पहुंच गए। यह दृश्य स्थानीय लोगों के लिए नया और उत्सुकता भरा था, क्योंकि क्षेत्र में पहली बार किसी शादी की रस्म में जेसीबी का उपयोग देखा गया। गांव वालों ने बताया कि जेसीबी मशीन के गांव में पहुंचने और मिट्टी कोड़ने का कार्य शुरू होने के साथ ही पूरे क्षेत्र में इसकी चर्चा होने लगी। कई लोगों ने अपने मोबाइल फोन से इसके वीडियो भी बनाए। परिवार के सदस्यों ने बताया कि उनका उद्देश्य इस रस्म को यादगार बनाना था। उन्होंने मेहनत और समय बचाने के साथ-साथ इसे एक आकर्षक रूप देने का प्रयास किया, जो सफल रहा। मठकोड़वा कार्यक्रम खुशी और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। यह घटना प्रदेश सरकार के ‘जेसीबी मॉडल’ की लोकप्रियता को शादी-ब्याह की रस्मों तक पहुंचाती दिख रही है। पहले जहां जेसीबी का उपयोग मुख्य रूप से सरकारी और निर्माण कार्यों तक सीमित था, वहीं अब ग्रामीण आयोजनों में भी इसका इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। इजरही गांव के इस कार्यक्रम ने लोगों के बीच आधुनिकता और परंपरा के मेल पर एक नई बहस छेड़ दी है।
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