आगरा नगर निगम के 13वें अधिवेशन में जलकल बिलों पर ब्याज माफी योजना को मंजूरी मिलते ही सदन में हंगामा खड़ा हो गया। प्रस्ताव पेश होते ही कई पार्षदों ने जलकल विभाग की वसूली प्रणाली, पुराने बकाया और नए बिलों के नियमों पर सवाल उठाए। और पार्षदों ने खूब हंगामा किया। यह छूट एकमुश्त योजना के तहत 1 जनवरी से लागू होगी। बैठक में वर्ष 2025–26 के पुनरीक्षित बजट को भी हरी झंडी दी गई। आय में मामूली कटौती कर इसे 1590.75 करोड़ रुपये किया गया, जबकि व्यय 1427.05 करोड़ रुपये तय हुआ। जलकल विभाग का बजट बढ़ाकर 152.55 करोड़ रुपये और व्यय 138.85 करोड़ रुपये पर स्वीकृत किया गया। सदस्य राकेश जैन के प्रस्ताव पर बिलों पर ब्याज छूट की योजना पारित हुई, जिससे बकायेदारों को राहत मिलेगी। सदन में हाउस टैक्स और पार्किंग शुल्क बढ़ाने, टोरेंट पावर पर चल रहे बकाया, शहर में कुत्तों, बंदरों और चूहों के नियंत्रण, और अवैध पार्किंग जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, पार्षदों ने शहर में कई अनधिकृत पार्किंग संचालित होने का मुद्दा उठाया और कहा कि इन पर नियंत्रण या संचालकों से रजिस्ट्रेशन शुल्क वसूला जाना चाहिए। बैठक में नामांतरण से जुड़े शासनादेश को भी अनुमोदन मिला। आईजीआरएस शिकायतों पर सदस्य प्रकाश केशवानी ने कहा कि कई लोग बिना अधिकार के नाली, सड़क और इंटरलॉकिंग जैसी मांगें दर्ज कर रहे हैं, जिन्हें सत्यापित किया जाना जरूरी है। तीखी नोकझोंक और बहस के बीच सदन की अध्यक्ष हेमलता दिवाकर ने पार्षदों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि बैठक का मुख्य उद्देश्य बजट और नगर निगम के हितों पर चर्चा करना है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि गरिमा बनाए रखते हुए कार्यवाही को आगे बढ़ाया जाए।
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