चित्रकूट जिले में कोषागार घोटाले की जांच जारी है। विशेष जांच दल (SIT) ने देर रात तक कोषागार के अधिकारियों और एकाउंटेंट से आमने-सामने बिठाकर भुगतान संबंधी फाइलों और ऑनलाइन रिकॉर्ड की गहन जांच की। इस दौरान तीन एकाउंटेंट ने कई बार अपने हस्ताक्षर न होने का दावा किया। हालांकि, वरिष्ठ कोषाधिकारी ने उनकी फाइलों और आईडी से मिलान कर दिखाया, जिसके बाद उन्होंने भुगतान करना स्वीकार कर लिया। जांच के दौरान, इन तीनों एकाउंटेंट ने 12 ऐसे खातों की पहचान की, जिनमें लगभग 10 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था। उन्होंने दावा किया कि इन खातों में उनके हस्ताक्षर नहीं हैं और उन्होंने ये भुगतान नहीं किए हैं। एकाउंटेंट ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी आईडी का पासवर्ड चोरी कर विभागीय अधिकारियों ने भुगतान किया होगा। इस दावे के बाद एसआईटी ने वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह को भी जांच के दायरे में लिया है। इससे पहले, जिला पुलिस ने विभागीय जांच के बाद अपराध अनुसंधान संगठन लखनऊ से मामले की जांच कराने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा था, जिस पर अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। इसी बीच, कोषागार विभाग के निदेशक वीके सिंह ने आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और साइबर विशेषज्ञों से भी जांच कराने की बात कही है।
कोषाधिकारी रमेश सिंह ने बताया कि उन्हें अभी तक कोई नया आदेश नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि विभागीय जांच पहले भी हुई है और उच्चाधिकारी दोषियों को सजा दिलाने के लिए समय-समय पर अन्य जांच कराते रहेंगे। जांच के दौरान आरोपी पेंशनरों, बिचौलियों और विभागीय अधिकारियों से संपत्ति का पूरा विवरण मांगा गया था, जो अभी तक किसी ने नहीं दिया है। इसके लिए सोमवार को रिमाइंडर नोटिस भेजे जाएंगे। इसके बाद डरे सहमे एकाउंटेंट ने स्वीकार कर लिया कि उनके हस्ताक्षर तो हैं और अपनी आईडी विभाग के नामजद एटीओ व एकाउंटेंट को दे रखी थी। इस घोटाले में अपना हिस्सा होने से बार बार इंकार किया लेकिन एसआईटी ने तीनों को संदेह के दायरे में रखा है। तीनों को जिला छोड़कर न जाने के निर्देश दिए हैं।
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