चित्रकूट कोषागार में हुए 43.13 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच अब साइबर विशेषज्ञ और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) करेगी। कोषागार निदेशक वीके सिंह ने इस संबंध में शासन को पत्र लिखा है। इस जांच का उद्देश्य घोटाले की गहराई तक पहुंचना और कोषागार सॉफ्टवेयर के दुरुपयोग का पता लगाना है। यह घोटाला कार्मिकों की मिलीभगत से हुआ था। अब तक 43.13 करोड़ रुपये में से केवल 3.63 करोड़ रुपये की ही रिकवरी हो पाई है। घोटाले की धनराशि 93 पेंशनरों के खातों में एरियर के नाम पर भेजी गई थी। घोटाला सामने आने के बाद निदेशालय स्तर पर कई कदम उठाए गए हैं। इनमें कोषागारों के सॉफ्टवेयर को अपग्रेड करने का निर्णय भी शामिल है। नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) मौजूदा सॉफ्टवेयर की कमियों को दूर करते हुए इसे अपग्रेड करेगा, ताकि भविष्य में ऐसे घोटालों को रोका जा सके। स्थानीय पुलिस ने इस मामले में अब तक दो सहायक लेखाकारों सहित लगभग 30 आरोपियों को हिरासत में लिया है। निदेशक कोषागार ने आरोपित दो सहायक लेखाकारों को निलंबित कर दिया है। इस घटना के बाद एक सहायक लेखाकार संदीप श्रीवास्तव का निधन हो चुका है। आरोपितों में एक सेवानिवृत्त सहायक कोषाधिकारी भी शामिल है।
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