कुशीनगर जिले में नहर सफाई अभियान के दौरान बड़े पैमाने पर पेड़ों की अवैध कटान का मामला सामने आया है। हाटा वन रेंज के खजुरिया शाखा नहर की सफाई के दौरान सिंचाई और वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत और लापरवाही उजागर हुई है, जहां वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी मौके से नदारद पाए गए। सिंचाई विभाग कुशीनगर के एक्सईएन विप्रसाद के अनुसार, 54 किलोमीटर लंबी नहर की सफाई की जा रही है, जिसमें वर्षों से जमा सिल्ट को हटाया जा रहा है। इस सफाई अभियान के तहत नहर के सेक्शन में आने वाले ज्यादातर जंगली पेड़ों को हटाने की बात कही गई थी, जबकि बाहरी क्षेत्र के पेड़ सुरक्षित रहने थे। पेड़ों की अवैध कटान को रोकने के लिए वन विभाग के अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। हाटा वन रेंज से एक दरोगा और अकटहा स्थित नर्सरी के कर्मचारियों को विशेष रूप से इस कार्य के लिए तैनात किया गया था। हालांकि, जब दैनिक भास्कर की टीम ने हाटा रेंज के मुसहरी और पुरैनी के आसपास के इलाकों का दौरा किया, तो मौके पर कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं मिला। सैकड़ों पेड़ों पर इलेक्ट्रॉनिक आरी चल चुकी थी, और स्थानीय ग्रामीण कुल्हाड़ी से काटकर लकड़ियां अपने उपयोग के लिए ले जा रहे थे। एक ट्रैक्टर पर 25 से 30 लकड़ी के लट्ठे लादे जा रहे थे, जिसके चालक के पास कोई वैध परमिशन नहीं थी। चालक ने बताया कि उसे वन विभाग के एक कर्मचारी ने फोन पर लकड़ी ले जाने की अनुमति दी थी। इस संबंध में हाटा रेंजर अमृता सिंह से बात करने पर उन्होंने बताया कि कुछ जगहों पर पेड़ों की कटान की सूचना मिली है और विभागीय अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि कोई अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं है और उनके पास सही आंकड़े नहीं हैं, तो वह स्वयं मौके पर जाकर उचित कार्रवाई करेंगी। कुछ देर बाद मौके पर पहुंचे वन विभाग के कर्मचारियों ने केवल 10 पेड़ काटे जाने का दावा किया, जबकि वास्तविक स्थिति इससे कहीं अलग थी। ड्यूटी पर तैनात वन दरोगा की अनुपस्थिति में सरकारी पेड़ों को ले जाने की ग्रामीणों में होड़ मची हुई थी, और वनकर्मी इस स्थिति में बेबस नजर आए।
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