देश के 12 राज्यों में चल रही SIR प्रोसेस की डेडलाइन 7 दिन बढ़ा दी गई है। अभी इसकती आखिरी तारीख 4 दिसंबर थी। यानी कि अब यह प्रोसेस 11 दिसंबर तक चलेगी। चुनाव आयोग का ये फैसले ऐसे समय में आया है, जब कई जिलों और प्रदेशों में BLO पर काम का दबाव ज्यादा होने की बात कही जा रही थी। कई राज्यों से BLO के सुसाइड के भी मामले सामने आ चुके हैं। बिहार के बाद देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR 28 अक्टूबर से शुरू हुआ है। 110 दिन के प्रोसेस में वोटर लिस्ट का अपडेशन होगा। नए वोटरों के नाम जोड़े जाएंगे और वोटर लिस्ट में सामने आने वाली गलतियों को सुधारा जाएगा। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को बताया कि आज रात से ही इन 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की वोटर लिस्ट फ्रीज हो जाएगी। खास बात ये है कि अगले साल चुनाव वाले बंगाल में SIR होगा, लेकिन असम में नहीं होगा। चुनाव आयोग का कहना है कि असम में नागरिकता से जुड़े नियम थोड़े अलग है, इसलिए वहां यह प्रक्रिया अलग तरीके से चलेगी।
नीचे देखें 12 राज्यों की लिस्ट जहां SIR हो रहा SIR की प्रोसेस को 7 सवाल-जवाब में जानें 1. SIR क्या है यह चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है। इसमें वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है। इसमें 18 साल से ज्यादा के नए वोटर्स को जोड़ा जाता है। ऐसे लोग जिनकी मौत हो चुकी है। जो शिफ्ट हो चुके हैं उनके नाम हटाए जाते हैं। वोटर लिस्ट में नाम, पते में हुई गलतियों को भी ठीक किया जाता है। BLO घर-घर जाकर खुद फॉर्म भरवाते हैं। 2. पहले किस राज्य में हुआ? पहले फेज में बिहार में हुआ। फाइनल लिस्ट में 7.42 करोड़ वोटर्स हैं। ये वोटर्स 6 और 11 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में वोट डालेंगे। 3. कौन करेगा SIR वाले 12 राज्यों में करीब 51 करोड़ मतदाता हैं। इस काम में 5.33 लाख बीएलओ (BLO) और 7 लाख से ज्यादा बीएलए (BLA) राजनीतिक दलों की ओर से लगाए जाएंगे। 4. SIR वाले राज्यों में विधानसभा चुनाव कब 5. SIR कब होगा, इसमें वोटर को क्या करना होगा SIR के दौरान BLO/BLA वोटर को फॉर्म देंगे। वोटर को उन्हें जानकारी मैच करवानी है। अगर दो जगह वोटर लिस्ट में नाम है तो उसे एक जगह से कटवाना होगा। अगर नाम वोटर लिस्ट में नहीं है तो जुड़वाने के लिए फॉर्म भरना होगा और संबंधित डॉक्यूमेंट्स देने होंगे। 6. SIR के लिए कौन से दस्तावेज मान्य 7. SIR मकसद क्या है 1951 से लेकर 2004 तक का SIR हो गया है, लेकिन पिछले 21 साल से बाकी है। इस लंबे दौर में मतदाता सूची में कई परिवर्तन जरूरी हैं। जैसे लोगों का माइग्रेशन, दो जगह वोटर लिस्ट में नाम होना। डेथ के बाद भी नाम रहना। विदेशी नागरिकों का नाम सूची में आ जाने पर हटाना। कोई भी योग्य वोटर लिस्ट में न छूटे और कोई भी अयोग्य मतदाता सूची में शामिल न हो। यह भी जानिए… नाम सूची से कट गया तो क्या करें? ड्राफ्ट मतदाता सूची के आधार पर एक महीने तक अपील कर सकते हैं। ईआरओ के फैसले के खिलाफ डीएम और डीएम के फैसले के खिलाफसीईओ तक अपील कर सकते हैं। शिकायत या सहायता कहां से लें? हेल्पलाइन 1950 पर कॉल करें। अपने बीएलओ या जिला चुनाव कार्यालय सेसंपर्क करें। बिहार की मतदाता सूची दस्तावेजों में क्यों जोड़ी गई? यदि कोई व्यक्ति 12 राज्यों में से किसी एक में अपना नाम मतदाता सूची मेंशामिल करवाना चाहता है और वह बिहार की एसआईआर के बाद की सूचीका अंश प्रस्तुत करता है, जिसमें उसके माता-पिता के नाम हैं, तो उसेनागरिकता के अतिरिक्त प्रमाण प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी। सिर्फजन्मतिथि का प्रमाण देना पर्याप्त होगा। क्या आधार को पहचान के प्रमाण के रूप में मान्यता दी गई है? सितंबर में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद चुनाव आयोग ने बिहार के चुनावअधिकारियों को निर्देश दिया था कि आधार कार्ड को मतदाताओं की पहचानस्थापित करने के लिए एक अतिरिक्त दस्तावेज के रूप में स्वीकार कियाजाए। आयोग ने स्पष्ट किया है कि आधार केवल पहचान प्रमाण के रूप मेंस्वीकार किया जाएगा, नागरिकता प्रमाण के रूप में नहीं।
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