भारतीय नौसेना को दो महत्वपूर्ण स्वदेशी युद्धक प्लेटफ़ॉर्म मिले हैं जिससे उसकी समुद्री शक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हम आपको याद दिला दें कि 24 नवंबर 2025 को नौसेना में INS माहे को शामिल किया गया था। यह माहे श्रेणी का पहला पनडुब्बी-रोधी उथले पानी का युद्धक पोत था। इसके कुछ ही दिनों बाद यानि 28 नवंबर 2025 को प्रोजेक्ट 17A के अंतर्गत निर्मित Taragiri (यार्ड 12653) को मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने नौसेना को सौंप दिया।
INS माहे के जलावतरण समारोह में पहली बार सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। जनरल द्विवेदी ने इसे ‘‘देश की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी वृद्धि’’ बताते हुए कहा था कि यह जहाज उथले जल में पनडुब्बी-रोधी अभियानों, तटीय गश्त और समुद्री मार्गों की सुरक्षा में प्रमुख भूमिका निभाएगा। हम आपको बता दें कि चुस्ती, सटीकता और सहनशीलता को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया यह पोत उन्नत टॉरपीडो और ASW रॉकेटों से लैस है। यह 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से बना है, जिससे आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण क्षमता को बड़ी मजबूती मिली है। नौसेना के अनुसार माहे तटीय रक्षा की प्रथम पंक्ति के रूप में बड़े युद्धपोतों, पनडुब्बियों और विमानन परिसंपत्तियों के साथ समन्वय में कार्य करेगा।
इसे भी पढ़ें: यूएसए और चीन के बाद भारत एशिया की तीसरी प्रमुख सैन्य शक्ति बना
वहीं Taragiri, जो प्रोजेक्ट 17A का चौथा और गत 11 महीनों में नौसेना को सौंपा गया तीसरा P17A फ्रिगेट है, भारतीय युद्धपोत डिजाइन क्षमताओं में एक ‘क्वांटम लीप’ माना जा रहा है। 75% स्वदेशी सामग्री वाले इस जहाज का निर्माण वारशिप डिजाइन ब्यूरो (WDB) के डिज़ाइन और वारशिप ओवरसीइंग टीम (मुंबई) की निगरानी में हुआ है। यह CODOG प्रणोदन प्रणाली, आधुनिक IPMS, उन्नत स्टील्थ डिजाइन, और ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल, MF-STAR रडार, MRSAM, 76 mm SRGM, और ASW टॉरपीडो एवं रॉकेटों से लैस है।
हम आपको बता दें कि पहले दो P17A जहाजों के अनुभव से Taragiri के निर्माण समय को 93 महीनों से घटाकर 81 महीने कर दिया गया है। प्रोजेक्ट 17A के शेष तीन युद्धपोत 2026 तक नौसेना में शामिल हो जाएंगे। लगभग 200 MSME की भागीदारी और सीधे-अप्रत्यक्ष 14,000 से अधिक रोजगार सृजन के साथ यह परियोजना ‘आत्मनिर्भर भारत’ के रक्षा क्षेत्र में नए मुकाम स्थापित कर रही है।
देखा जाये तो कम समय में INS माहे और Taragiri जैसे स्वदेशी युद्धपोतों का नौसेना में शामिल होना केवल दो तकनीकी उपलब्धियाँ भर नहीं हैं, यह भारत की समुद्री रणनीति में मूलभूत बदलाव का संकेत है। हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, चीन की बढ़ती नौसैनिक उपस्थिति, इंडो-पैसिफिक में शक्ति-संतुलन की चुनौतियाँ तथा घरेलू रक्षा-औद्योगिक आधार को मजबूत करने की आवश्यकता ने भारत को एक ऐसी नौसेना के निर्माण की ओर प्रेरित किया है, जो न केवल तटीय सुरक्षा बल्कि दूरवर्ती जलक्षेत्रों में भी निर्णायक भूमिका निभा सके।
हम आपको बता दें कि P17A और माहे श्रेणी दोनों स्वदेशी डिजाइन और निर्माण की उपलब्धियाँ हैं। दो दशक पहले तक भारत जटिल युद्धपोतों के लिए भारी विदेशी तकनीक पर निर्भर था, किंतु आज स्थिति तेजी से बदल रही है। 75% और 80% स्वदेशी सामग्री वाले ये प्लेटफ़ॉर्म उस शक्ति परिवर्तन का प्रमाण हैं। यह सिर्फ निर्माण की आत्मनिर्भरता नहीं, बल्कि रणनीतिक स्वायत्तता का विस्तार है— जहां देश के पास अपने प्लेटफ़ॉर्म को अपनी सामरिक सोच के अनुसार विकसित व उन्नत करने की स्वतंत्रता होती है।
इसके अलावा, INS माहे के जलावतरण में सेना प्रमुख की मौजूदगी प्रतीकात्मक से अधिक सामरिक महत्व रखती है। आज के बहुआयामी युद्धक्षेत्र में समुद्री, स्थल और वायु अभियानों के बीच अदृश्य लेकिन गहरे समन्वय की आवश्यकता है। भारतीय सशस्त्र बलों में यह तालमेल अब संस्थागत रूप ले रहा है, जो भविष्य की संयुक्त संचालन अवधारणा (Joint Doctrine) को मजबूत करेगा।
साथ ही हिंद महासागर व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और सामरिक मार्गों का हृदय है। चीन के बढ़ते नौसैनिक अड्डों, उसकी पनडुब्बियों की बढ़ती तैनाती, तथा ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ जैसी रणनीतियों के बीच भारत को अपने समुद्री क्षेत्रों में प्रतिदिन 24×7 निगरानी रखने की जरूरत है। Taragiri जैसे स्टील्थ फ्रिगेट ‘ब्लू वॉटर नेवी’ की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं—यानी ऐसी नौसेना जो समुद्र के दूरस्थ क्षेत्रों में लंबे समय तक संचालन कर सके। वहीं INS माहे जैसे पोत तटीय क्षेत्रों में भारत की ‘सी डिनायल’ और ‘सी कंट्रोल’ क्षमता को मजबूत करते हुए पनडुब्बी-रोधी सुरक्षा कवच तैयार करते हैं।
इसके अलावा, आज नौसैनिक युद्ध केवल मिसाइल रेंज या जहाज की गति तक सीमित नहीं। यह नेटवर्क-केंद्रित युद्ध, रीयल-टाइम सेंसर-फ्यूजन, मानवरहित प्रणालियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर निर्भर है। P17A में लगा MF-STAR, IPMS, और एकीकृत निर्माण पद्धति आधुनिक युद्ध की इसी अवधारणा की ओर संकेत देते हैं।
बहरहाल, भारत की नौसेना एक निर्णायक मोड़ से गुजर रही है— जहाँ वह तटीय सुरक्षा बल से एक पूर्ण-विकसित, आत्मनिर्भर, रणनीतिक रूप से सक्षम ‘ब्लू वॉटर नेवी’ के रूप में विकसित हो रही है। INS माहे और Taragiri की प्राप्ति इसी यात्रा के नवीनतम अध्याय हैं। ये केवल जहाज नहीं, बल्कि भारत के समुद्री आत्मविश्वास और बदलती सामरिक परिस्थिति में उसकी उभरती भूमिका के प्रतीक हैं।
https://ift.tt/Hc45qDX
🔗 Source:
Visit Original Article
📰 Curated by:
DNI News Live

Leave a Reply