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नालंदा के प्रफुल्ल बने आकाशवाणी वाराणसी के सहायक निदेशक:कार्यक्रम अधिशासी के पद पर तैनात थे, पहली पोस्टिंग शिमला में हुई थी; गांव में खुशी की लहर

नालंदा जिले के एक छोटे से गांव अलीपुर से निकलकर देश की प्रतिष्ठित प्रसारण सेवा में अपनी योग्यता का लोहा मनवाने वाले प्रफुल्ल सिन्हा की सफलता की कहानी प्रेरणादायक है। प्रसार भारती ने उन्हें असिस्टेंट डायरेक्टर प्रोग्राम के पद पर प्रमोशन दिया है। इस घोषणा के साथ ही पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। बिंद थाना क्षेत्र के जमसारी पंचायत स्थित अलीपुर गांव निवासी प्रफुल्ल सिन्हा रिटायर्ड इंजीनियर चंद्र भूषण सिन्हा के छोटे सुपुत्र हैं। उनकी शैक्षिक यात्रा की शुरुआत गांव के ही प्राथमिक विद्यालय से हुई थी। लेकिन मेधा और मेहनत के बल पर उन्होंने जो मुकाम हासिल किया है, हर युवा के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है। प्रफुल्ल सिन्हा की शैक्षणिक उपलब्धियां उल्लेखनीय रही हैं। पत्रकारिता में स्नातक के बाद उन्होंने नोएडा स्थित इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से मीडिया प्रबंधन में पीजीपीएमएम की डिग्री हासिल की। इसके बाद देश के प्रतिष्ठित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातकोत्तर की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। शोध में भी उत्कृष्टता का प्रदर्शन प्रफुल्ल की प्रतिभा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यूजीसी की ओर से आयोजित नेट परीक्षा में उन्होंने लगातार चार बार जूनियर रिसर्च फेलोशिप प्राप्त की। यह उपलब्धि उनकी अकादमिक गहराई और शोध क्षमता को रेखांकित करती है। प्रसार भारती में सेवा यात्रा वर्ष 2013 में प्रसार भारती की ओर से आयोजित त्रिस्तरीय चयन प्रक्रिया में प्रफुल्ल का चयन हुआ। दो वर्ष बाद 2015 में उनकी पहली नियुक्ति आकाशवाणी शिमला में कार्यक्रम अधिशासी के पद पर हुई। वर्ष 2019 में उनका स्थानांतरण आकाशवाणी वाराणसी कर दिया गया, जहां वे पिछले कई वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे थे। 27 नवंबर 2025 को प्रसार भारती ने प्रफुल्ल सिन्हा को प्रसार भारती प्रोग्राम सर्विसेज के अंतर्गत असिस्टेंट डायरेक्टर प्रोग्राम के पद पर पदोन्नत करने की घोषणा की। यह पदोन्नति उनकी कार्यकुशलता, समर्पण और व्यावसायिक उत्कृष्टता का प्रमाण है। गांव में खुशी का माहौल प्रफुल्ल की इस उपलब्धि पर पूरे अलीपुर गांव और आसपास के इलाके में हर्ष का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रफुल्ल बचपन से ही मेधावी और संस्कारी रहे हैं। उनकी सफलता से गांव का नाम रोशन हुआ है और युवाओं को प्रेरणा मिली है कि कठिन परिश्रम और लगन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। अपनी पदोन्नति पर प्रफुल्ल सिन्हा ने कहा कि यह उपलब्धि मेरे माता-पिता और गांव वालों के आशीर्वाद का परिणाम है। मैं सदैव अपनी जड़ों से जुड़ा रहूंगा और अपने कर्तव्यों का निष्ठा से निर्वहन करता रहूंगा।


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