सिटी रिपोर्टर | औरंगाबाद औरंगाबाद जिले में ऐसा ही एक बड़ा मामला उजागर हुआ, जब कुटुंबा थाना में पदस्थापित सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) महेंद्र पासवान को अवैध शराब रखने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने उनके सरकारी आवासनुमा कमरे से बियर के छह कैन बरामद किए। खास बात यह कि गिरफ्तारी थाने या आवास से नहीं बल्कि कोर्ट परिसर से की गई, जहां एएसआई एक आरोपी को रिमांड पर लाने पहुंचे थे।मामले पर एसडीपीओ संजय कुमार पांडेय ने स्पष्ट कहा कि शराबबंदी कानून के मामले में किसी को भी छूट नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि एएसआई महेंद्र पासवान की गिरफ्तारी कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है और अब निष्पक्ष जांच चल रही है।उन्होंने कहा कि शराब बरामदगी, कमरे की स्थिति, एएसआई के दावे और छापेमारी के दौरान मिले साक्ष्यों की पूरी जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि एएसआई वास्तव में दोषी हैं या किसी साजिश का हिस्सा बने।एसडीपीओ ने कहा कि पुलिस विभाग की ओर से भी यही निर्देश है कि शराबबंदी कानून का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाए, चाहे वह कोई भी व्यक्ति क्यों न हो। यही कारण है कि पूरे मामले में पारदर्शी तरीके से कार्रवाई की जा रही है। घटना की शुरुआत तब हुई जब कुटुंबा थाना पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि एएसआई महेंद्र पासवान अपने बैरक स्थित सरकारी कमरे में शराब रखे हुए हैं। थानाध्यक्ष इमरान आलम ने जानकारी की पुष्टि के बाद मामले से वरीय अधिकारियों को अवगत कराया। तत्पश्चात ओडी पदाधिकारी मिक्कू कुमार और पुलिस बल के साथ थानाध्यक्ष ने बैरक परिसर में छापेमारी की। एएसआई के कमरे का मुख्य दरवाजा बंद था, जिसे तोड़कर पुलिस अंदर पहुंची। वर्ष 2022 में भी शराब के साथ पकड़े गए थे उत्पाद पुलिस के अधिकारी व जवान : वर्ष 2022 में अवैध शराब बरामदगी के मामले में उत्पाद विभाग की बड़ी किरकिरी हुई थी, जब विभाग के एएसआई , सिपाही और कार्यालय के प्रधान लिपिक को शराब की बोतलों के साथ गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई शहर के नागा बिगहा रोड स्थित एक आवासीय फ्लैट में की गई थी, जहां पुलिस ने छापेमारी कर बड़ी मात्रा में शराब बरामद की थी।गौरतलब है कि दोनों एएसआई और सिपाही उसी फ्लैट में किरायेदार के रूप में रहते थे। गिरफ्तार कर्मचारियों के पास से बरामद शराब ने विभाग की प्रतिष्ठा पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया था। स्थानीय लोग नाराज, बोले– अभियान की विश्वसनीयता पर उठ रहा सवाल मामले के सामने आते ही स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी गई। लोगों ने कहा कि शराबबंदी कानून लागू करने की जिम्मेदारी पुलिस पर है, लेकिन जब वही अधिकारी इसके उल्लंघन में पकड़े जाएं, तो यह पूरे अभियान की छवि पर चोट पहुँचाता है। कई ग्रामीणों ने कहा कि शराबबंदी बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जो सामाजिक सुधार से जुड़ी है।
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