इटली में किसी महिलाओं की अगर सिर्फ इसलिए हत्या की गई, क्योंकि वह महिला है तो इसे एक अलग और गंभीर अपराध माना जाएगा। इसे फेमीसाइड कहा जाता है। इटली की संसद ने 25 नवंबर को इसे लेकर एक कानून पास किया। सरकार और विपक्ष दोनों ने इसका समर्थन किया। इस नए कानून के तहत अगर किसी महिला की उसके जेंडर के कारण हत्या होती है, तो आरोपी को उम्रकैद की सजा दी जाएगी। दो साल पहले इटली में 22 साल की स्टूडेंट जूलिया चेकेटिन को उसके पूर्व बॉयफ्रेंड ने हत्या कर दी थी, क्योंकि उसने उसके साथ रिश्ता रखने से मना कर दिया था। इसके बाद फेमीसाइड को कानूनी मान्यता देने की मांग हो रही थी। फेमीसाइड क्या होता है जानिए फेमीसाइड वह अपराध है जिसमें किसी महिला या लड़की की हत्या इसलिए कर दी जाती है क्योंकि वह महिला है। समाज में मौजूद लैंगिक भेदभाव, हिंसा या सत्ता के दुरुपयोग के कारण उसे कमजोर माना जाता है। यह ग्लोबल लेवल पर माना जाने वाला शब्द है, जिसका इस्तेमाल खास तौर से महिलाओं पर होने वाली हिंसा को पहचानने और उसे रोकने के लिए किया जाता है। एक्स बॉयफ्रेंड ने महिला को 70 बार चाकू मारा था इटली में यह कानून इसलिए जरूरी हो गया क्योंकि पिछले कुछ समय में महिलाओं के खिलाफ हमले की कई बड़ी घटनाएं हुईं हैं। 2023 में एक छात्रा की उसके पूर्व प्रेमी ने हत्या कर दी थी। उसने उसे लगभग 70 बार चाकू से गोदा था। लड़की ने अपनी मौत से पहले एक लिस्ट भी बनाई थी, जिसमें उसने बताया था कि उसका बॉयफ्रेंड उसे कैसे कंट्रोल में रखने की कोशिश करता था। उसे बार-बार मैसेज करने के लिए कहता था, दोस्तों से मिलने नहीं देता था और हर छोटी बात पर गुस्सा करता था। इस तरह के मामलों ने इटली में लोगों को झकझोर दिया। इसलिए सरकार ने फैसला किया कि महिलाओं की हत्या को एक अलग अपराध के रूप में माना जाए ताकि समाज में जागरूकता बढ़े और ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लिया जाए। मेलोनी बोलीं- चाहती हूं देश में हर महिला सुरक्षित महसूस करे इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कहा कि वह ऐसा देश बनाना चाहती हैं जहां कोई भी महिला खुद को असुरक्षित या अकेली महसूस न करे। मेक्सिको और चिली के साथ इटली अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जहां फेमीसाइड को अपराध माना जाता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ कानून बनाने से कुछ नहीं होगा। पुलिस, कोर्ट और समाज की सोच में बदलाव भी जरूरी है। इसी वजह से इटली की संसद में एक और कानून पर चर्चा चल रही है, जिसमें कहा गया है कि बिना सहमति के सेक्स को सीधे रेप माना जाए। कुछ राजनीतिक दल इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन इस पर बहस जारी है।
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