अपना दल कमेरावादी की राष्ट्रीय नेता, विधायक पल्लवी पटेल ने यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 को लेकर केंद्र सरकार और उच्च शिक्षण संस्थानों पर तीखा हमला बोला है। शनिवार को लखनऊ में उन्होंने कहा कि भारत समानता का देश है, लेकिन हकीकत यह है कि जाति, धर्म और वर्ग के आधार पर भेदभाव की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिसकी पुष्टि सरकार के अपने आंकड़े करते हैं। पल्लवी पटेल ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत शोषण और भेदभाव के मामलों में 118 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह दावा किसी राजनीतिक दल का नहीं बल्कि सरकार के आधिकारिक आंकड़ों का है। पल्लवी पटेल के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने भी इन आंकड़ों की गंभीरता को स्वीकार किया है और यूजीसी ने स्वयं इस स्थिति को माना है। UGC इक्विटी रेगुलेशन 2026 का समर्थन
अपना दल (कमेरावादी) की नेता ने UGC इक्विटी रेगुलेशन 2026 का समर्थन करते हुए कहा कि यह रेगुलेशन उच्च शिक्षण संस्थानों में वंचित वर्गों के साथ हो रहे दमन और अन्याय को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों ने देश के सामने यह सच्चाई रख दी है कि सिस्टम के भीतर भेदभाव कितना गहरा है। सरकार पर आरोप, रेगुलेशन को तोड़-मरोड़ कर किया पेश
पल्लवी पटेल ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस रेगुलेशन को अपने हिसाब से मोड़कर पेश किया है। उनका कहना है कि इससे समस्या का समाधान होने के बजाय पूरे देश को ‘अगड़ा बनाम वंचित’ की लड़ाई में झोंक दिया गया है, जो सामाजिक सौहार्द और समानता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। उच्च शिक्षा में समानता लागू करने की मांग
पल्लवी पटेल ने कहा कि यदि वास्तव में समानता और न्याय की स्थापना करनी है तो उच्च शिक्षण संस्थानों में वंचित वर्गों के अधिकारों की प्रभावी रक्षा करनी होगी। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन को निष्पक्ष और ईमानदारी से लागू किया जाए, ताकि शिक्षा के क्षेत्र में भेदभाव समाप्त हो सके।
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