सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएनएमसी) में सामने आए कथित रैगिंग मामले में अब नया मोड़ आ गया है। जिस मामले को लेकर एमबीबीएस छात्र ने सीनियर छात्रों पर रैगिंग, मारपीट और धमकी के आरोप लगाए थे, उस प्रकरण में अब दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है। यह समझौता थाना एम गेट में पुलिस की मौजूदगी में हुआ है। क्या है पूरा मामला
हाथरस निवासी रामकुमार पुत्र कालीचरण, जो एसएनएमसी में एमबीबीएस थर्ड ईयर (2023 बैच) का छात्र है, ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। रामकुमार के अनुसार, 1 जनवरी 2026 की रात करीब 9:15 बजे वह अस्पताल परिसर स्थित छात्रावास की पार्किंग में अपनी गाड़ी खड़ी करने गया था। इसी दौरान वहां मौजूद फोर्थ ईयर के छात्र सूरज चौधरी, रितुराज जाटव, गौतम बडेरिया और विवेक ने उसे रोककर कथित रूप से रैगिंग शुरू की। विरोध करने पर गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया। बीच-बचाव के लिए पहुंचे उसके भाई लखन के साथ भी मारपीट का आरोप था। पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी। प्रिंसिपल प्रशांत गुप्ता का बयान
एसएनएमसी के प्रिंसिपल डॉ. प्रशांत गुप्ता ने इस मामले को रैगिंग से इन्कार करते हुए कहा कि यह रैगिंग नहीं, बल्कि आपसी विवाद का मामला था, जो पैसों को लेकर हुआ था। उन्होंने बताया कि शिकायत करने वाला छात्र हॉस्टल में नहीं रहता है और वह थर्ड ईयर का छात्र है। ऐसे में थर्ड ईयर के छात्र के साथ रैगिंग की बात तर्कसंगत नहीं है, क्योंकि रैगिंग आमतौर पर फ्रेशर्स के साथ होती है। प्रिंसिपल ने यह भी कहा कि दोनों छात्रों के बीच अब थाना एम गेट में समझौता हो चुका है और कॉलेज स्तर पर भी मामले की समीक्षा की गई है।
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