डिब्बा बंद उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले रसायन कैंसर के जोखिम को बढ़ रहे हैं। इन उत्पादों में एथिलीन ऑक्साइड समेत कई प्रकार के रसायन संरक्षक के रूप में प्रयोग किये जाते हैं। नुकसानदायक ये रसायन पैक्ड चिप्स,आटा, दूध, मांस सहित दूसरे खानपान की चीजों में मिल जाते हैं। ये उत्पाद कैंसर के खतरे को बढ़ा देते हैं।
ये बातें बुधवार को SGPGI के एंडोक्राइनोलॉजी सर्जरी विभाग के डॉ.ज्ञान चन्द ने विश्व कैंसर दिवस पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में कहीं। डॉ.ज्ञान ने बताया कि बदली जीवन शैली और बाजार के खानपान के बढ़ते चलन ने कैंसर रोगियों की संख्या में इजाफ हुआ है। बीते पांच वर्ष में विभाग में करीब 4 गुना कैंसर रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है। जागरूकता की वजह से मरीज अस्पताल जल्दी पहुंच रहे हैं। 28 में एक महिला को कैंसर का खतरा थायराइड और ब्रेस्ट सर्जन डॉ. ज्ञान ने बताया कि 28 महिलाओं में से एक को कैंसर होता है। स्तन में किसी प्रकार का ऊभार या गांठ दिखने पर संकोच न करें। घर के सदस्यों को बताएं और डॉक्टर की सलाह लें। उन्होंने बताया कि स्तन, थायराइड, सर्विक्स और मुंह के कैंसर का शुरू में इलाज से पूरी तरह से बचाव संभव है। समारोह संस्थान के निदेशक आरके धीमन और एंडाक्राइन सर्जन डॉ. अंजलि मिश्रा ने कहा कि कैंसर के लक्षणों का पता चलते ही डॉक्टर से सलाह लें। शुरूआत में उपचार से कैंसर को काबू किया जा सकता है। समारोह में कैंसर सर्वाइवल और परिजनों ने कहानी साझा की। बचाव के उपाय: सर्वाइवल कैंसर रोगियों का बढ़ा रही हौसला 50 ललिता को छह वर्ष पहले स्तन कैंसर का पता चला। SGPGI में डॉ. ज्ञान चन्द से मिलकर कर ऑपरेशन कराया। ठीक होने के बाद कैंसर पीड़ित महिला का पता चलने पर उसका हौसला बढ़ाती हैं। पीजीआई भेजकर उपचार में भी मदद करती हैं। दो वर्ष में छह स्तन कैंसर की महिलाओं को त्वरित इलाज दिलाकर मदद की है। इसी तरह 49 वर्षीय महिला प्रमिला सिंह ने बताया कि तीन वर्ष पहले स्तन में गांठ का पता चला। निजी अस्पताल गए। वहां से पीजीआई रेफर किया। ऑपरेशन के बाद अब पूरी तरह ठीक है। सामान्य जीवन जी रही हैं।
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