प्रयागराज के त्रिवेणी तट पर एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (NCZCC), संस्कृति मंत्रालय और संस्कार भारती के संयुक्त तत्वावधान में ‘चलो मन गंगा-यमुना तीर’ कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। इसमें लोकगायन, नृत्य और भक्ति संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत भक्ति गीतों से हुई। गायिका अंकिता चतुर्वेदी ने प्रयागराज की महिमा का बखान करते हुए “सब तीर्थ का राजा जग में पावन प्रयागराज है” गीत प्रस्तुत किया। उन्होंने “मेरे भोले नाथ जी” और “सियाराम लिख देना” जैसे भजनों के साथ सूफी गीत “दमा दम मस्त कलंदर” भी गाया, जिसने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद मीना खन्ना और उनके दल ने उत्तर प्रदेश के समृद्ध लोकनृत्यों का प्रदर्शन किया। कजरी नृत्य और प्रयाग के प्रसिद्ध ढेड़िया लोकनृत्य की प्रस्तुतियों ने क्षेत्रीय कला की विशिष्टता को दर्शाया। ओजपूर्ण महिषासुर वध नृत्य और रासलीला ने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में महाराष्ट्र से आए विशाल गेंदले और उनकी टोली ने शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति दी। राग हंसध्वनि और राग यमन की जुगलबंदी ने संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके उपरांत, दिलीप कुमार यादव और उनकी टीम ने बिरहा के माध्यम से लोकजीवन की संवेदनाओं को सहजता से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के समापन पर नगर मजिस्ट्रेट विनोद सिंह, अपर नगर आयुक्त राजीव कुमार शुक्ला और NCZCC के उपनिदेशक डॉ. आदित्य श्रीवास्तव ने कलाकारों को सम्मानित किया। सभी कलाकारों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए ‘पौधा’ भेंट कर सम्मानित किया गया। यह सांस्कृतिक आयोजन देर शाम तक चला, जिसने त्रिवेणी तट पर संगीत और नृत्य का मनमोहक वातावरण निर्मित किया।
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