KGMU के मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी विभाग के सहयोग से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विभाग ने पहली बार प्लग-असिस्टेड रेट्रोग्रेड ट्रांसवेनस ऑब्लिटरेशन (पार्टो) प्रक्रिया की है। इससे लिवर सिरोसिस से पीड़ित 55 वर्षीय महिला को नया जीवन मिला है। गंभीर हालत में की गई थी भर्ती गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो.सुमित रुंगटा ने बताया कि यह प्रक्रिया हरदोई की रहने वाली एक महिला पर की गई, जो हेपेटाइटिस-सी के कारण लिवर सिरोसिस की गंभीर स्थिति से पीड़ित थीं। इसकी वजह से महिला को पेट और आंतों में रक्तस्राव हो रहा था। जांच के बाद महिला को विभाग में भर्ती कराया गया। एंडोस्कोपिक जांच में पाया गया कि महिला की पेट की रक्त वाहिका सूज गईं थीं। रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ने की वजह से रक्तस्राव हो रहा था। इसके लिए महिला को ग्लू का इंजेक्शन दिया गया, लेकिन राहत नहीं मिली। इसके बाद पेट के सीटी स्कैन में रक्तस्राव के स्थान का पता किया गया। इस विधि की ये हैं खूबी बार-बार होने वाले रक्तस्राव और रेडियोलॉजिकल निष्कर्षों को देखते हुए, डॉक्टरों ने पार्टो प्रक्रिया का निर्णय लिया। सामान्य मामलों में इसके लिए बैलून लगे हुए कैथेटर का इस्तेमाल किया जाता है। जबकि इस प्रक्रिया में बैलून के बजाय एम्पलैटजर वैस्कुलर प्लग और जिलेटिन स्पंज का उपयोग करके खून के प्रवाह को रोका जाता है। प्रक्रिया के बाद रोगी की स्थिति में सुधार हुआ। उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और वह वर्तमान में आउट पेशेंट विभाग में नियमित फॉलो-अप पर हैं।
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