मुरादाबाद में कुछ अधिकारियों की सरपरस्ती में भू माफिया गैंग अरबों रुपए की नजूल लैंड को ठिकाने लगा चुका है। इसमें फर्जी एनओसी के इस्तेमाल के मामले भी सामने आए हैं। इन मामलों में कड़ी कार्रवाई नहीं होने से माफिया गैंग का दुस्साहस इतना बढ़ा है कि उसने अब बाकी पड़ी नजूल लैंड के भी एग्रीमेंट कराने शुरू कर दिए हैं। अरबों रुपए की कीमत वाली इस नजूल लैंड को ठिकाने लगाने के खेल में शहर के कुछ व्हाइट कॉलर डॉक्टर और नेता भी शामिल हैं। मुरादाबाद के अनुज सिंह ने अब इस मामले में एक चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा है कि नजूल की संपत्तियों के भूखंडों की खरीद फरोख्त और एग्रीमेंट शासन की अनुमति के बगैर किए जाने के मामले प्रकाश में आ रहे हैं। ये गंभीर मामला है और ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दरअसल कुछ समय पहले नगर निगम द्वारा कब्जा मुक्त कराई गई नजूल की एक भूमि को कुछ लोग एग्रीमेंट के जरिए स्थानीय लोगों को बेचने का प्रयास कर रहे हैं। पूरा मामला जिलाधिकारी अनुज सिंह के संज्ञान में आया। इसके बाद इस नजूल लैंड को बचाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
डीएम ने कहा कि, संज्ञान में आया है कि नजूल संपत्तियों के भूखंडों की खरीद फरोख्त बिना शासन की अनुमति के की जा रही है।ऐसे मामलों की जांच शुरू कर दी गई है। नजूल भूमि को खरीदने वाले और बेचने वाले, दोनों के ही खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मुरादाबाद में बडे़ पैमाने पर नजूल संपत्तियों पर अवैध कब्जे करने और उन्हें फर्जी एनओसी के जरिए हड़पे जाने के कई मामले सामने आ चुके हैं। सिविल लाइंस में एक बड़ा हॉस्पिटल भी नजूल लैंड पर बन रहा है। जिलाधिकारी के स्पष्ट निर्देश के बाद भी मुरादाबाद विकास प्राधिकरण ने अभी तक इस मामले में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की है। यहां नजूल की भूमि को कब्जा मुक्त कराने के लिए कोई भी प्रयास अभी तक जिला प्रशासन, नगर निगम और एमडीए की ओर से नहीं किया गया है। जांच में पता चला था कि जिस एनओसी पर हॉस्पिटल बनकर खड़ा हुआ है, वह एनओसी ही फर्जी है। यह एनओसी ओसी नजूल के रिकॉर्ड पर दर्ज ही नहीं है। बगैर विभाग की रिपोर्ट लिए एनओसी पर दस्तखत करने वाले तहसील के अधिकारियों पर भी तलवार लटक रही है। लेकिन अधिकारी इस मामले में कार्रवाई करने में कतरा रहे हैं। जिससे संबंधित अधिकारियों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर क्यों प्रशासन नजूल लैंड पर कब्जे के मामले में आंखें मूंदे है।
नजूल लैंड पर कब्जा करने वाले ऐसे भू माफियाओं पर कार्रवाई नहीं होने की वजह से भू माफियाओं का दुस्साहस बढ़ा है और वो लगातार सरकारी संपत्तियों को कब्जा करके उन्हें बेचते चले जा रहे हैं। बड़ा सवाल ये है कि क्या अधिकारियों की मिलीभगत के बगैर ये मुमकिन है?
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