केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) को लेकर आगरा में परीक्षा देने पहुंचे शिक्षकों ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। शिक्षकों का कहना है कि वे पिछले 15 से 25 साल से बच्चों को पढ़ा रहे हैं, इसके बावजूद सरकार की नई नीति के तहत उन्हें दोबारा परीक्षा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। शिक्षकों ने साफ कहा कि अगर परीक्षा करानी ही है, तो युवाओं और पहले से कार्यरत शिक्षकों की परीक्षा अलग-अलग कराई जाए, क्योंकि दोनों के बीच सीधा मुकाबला उम्र और समय के अंतर के कारण न्यायसंगत नहीं है। इसके साथ ही कहा कि हमें बीएलओ में लगा दिया गया तो हम कब पढ़ते। सीटीईटी परीक्षा आगरा जिले में दो पालियों में 35 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई। आगरा पब्लिक स्कूल परीक्षा केंद्र पर परीक्षा देने आए अधिकतर अभ्यर्थी पहले से कार्यरत शिक्षक थे, जबकि कुछ युवा शिक्षक बनने की उम्मीद लेकर पहुंचे थे। कई केंद्रों पर ऐसे दृश्य भी देखने को मिले, जहां शिक्षक माता-पिता और उनके बच्चे अलग-अलग केंद्रों पर परीक्षा देने पहुंचे। बरौली अहीर क्षेत्र सहित कई क्षेत्रों से अभ्यर्थी ऐसे थे कि शिक्षक पिता या माता और बच्चों दोनों की आज परीक्षा थी।ऐसे ही फिरोजाबाद के जसराना क्षेत्र से एक शिक्षक मां और उनकी बेटी भी सीटीईटी परीक्षा में शामिल हुईं। शिक्षक अभिभावक अपनी नौकरी बचाने के लिए परीक्षा देने आए थे, जबकि उनके बच्चे शिक्षक बनने की उम्मीद में परीक्षा दे रहे थे। शिक्षक सुमित ने बताया कि वे पिछले 25 साल से सेवा दे रहे हैं और चुनाव के दौरान BLO ड्यूटी के कारण परीक्षा की तैयारी नहीं कर पाए। उन्होंने कहा कि अनुभव होने के बावजूद नए अभ्यर्थियों के साथ परीक्षा कराना गलत है। शिक्षक करण सिंह धाकंड ने कहा कि स्कूल स्तर के प्रश्न आसान थे, लेकिन प्रतियोगी परीक्षा के पैटर्न में युवा आगे निकल जाते हैं। अभ्यर्थी धारा सिंह ने बताया कि युवाओं के पास तैयारी का पूरा समय होता है, जबकि शिक्षकों के साथ समय और उम्र दोनों बाधा बनती हैं। एक अन्य शिक्षक ने कहा कि जब वे नौकरी में आए थे, तब सभी मानकों के अनुसार चयन हुआ था। अब नियमों को पिछली तारीख से लागू करना गलत है। शिक्षकों ने दोहराया कि अगर परीक्षा अनिवार्य है, तो युवाओं और अनुभवी शिक्षकों की परीक्षा अलग-अलग कराई जाए।
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