झांसी में 70 लाख की रिश्वत लेने वाली सेंट्रल जीएसटी की डिप्टी कमिश्नर (IRS अफसर) प्रभा भंडारी बहुत शातिर है। गिरफ्तारी के बाद सीबीआई उनके नमो होम्स स्थित फ्लेट नंबर A–311 की तलाशी लेना चाहती थी, मगर प्रभा भंडारी ने फ्लेट की चाबी नहीं दी। वो लगभग 24 घंटे तक सीबीआई को छकाती रही। फ्लेट के बाहर सीबीआई टीम डेरा डाले थी। जब चाबी नहीं मिली तो टीम ने लॉक तोड़ने वाले मैकेनिक बुलाए। लॉक तोड़कर सीबीआई टीम फ्लेट के अंदर दाखिल हुई। 4 घंटे तलाशी ली गई। सीबीआई के एक अफसर ने बताया- फ्लेट से लगभग 30 लाख रुपए के गहने, डेढ़ लाख रुपए कैश और फ्लेट के कागजात मिले है। ये फ्लेट प्रभा भंडारी और उनके पति के नाम पर है। अब प्रभा भंडारी के बैंक खातें भी खंगाले जा रहे हैं। 18 दिसंबर को सेंट्रल GST ने जय अम्बे प्लाईवुड और जय दुर्गा हार्डवेयर पर छापा मारकर करोड़ों की टैक्स चोरी पकड़ी थी। जीएसटी अफसरों ने मामले को निपटाने और टैक्स को घटाकर 50 लाख करने की एवज में डेढ़ करोड़ की रिश्वत मांगी। सीबीआई ने मंगलवार को 70 लाख की घूस लेते सुपरिटेंडेंट अनिल तिवारी और अजय शर्मा को रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। उनके साथ दुर्गा हार्डवेयर फर्म के मालिक राजू मंगनानी और वकील नरेश को भी अरेस्ट किया था। बाद में दिल्ली से डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी को अरेस्ट कर लिया था। CBI की FIR में दो और कारोबारियों के नाम झांसी सेंट्रल जीएसटी ऑफिस में रिश्वतखोरी का खुलासा होने के बाद सीबीआई ने लखनऊ में 7 नामजद व अन्य के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। इसमें डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी, जीएसटी सुपरिडेंटेंड सिविल लाइन निवासी अनिल तिवारी और शिवाजी नगर निवासी अजय शर्मा, सिविल लाइंस निवासी वकील नरेश कुमार गुप्ता और मयूर विहार कॉलानी निवासी जय दुर्गा हार्डवेयर के मालिक राजू मंगनानी अरेस्ट हो चुके हैं। इसके अलावा राजू का भाई तेजपाल मंगनानी और आवास विकास कॉलोनी-1 निवासी जय अंबे प्लाईवुड के मालिक लोकेश तोलानी को भी आरोपी बनाया गया है। पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई इंस्पेक्टर आशीष कुमा सिंह कर रहे हैं। सीबीआई ने डिप्टी कमिश्नर समेत दोनों सुपरिडेंटेंड की अकूत संपत्तियां खंगालना शुरू कर दिया है। 12 दिन से पल-पल का इनपुट जुटा रही थी सीबीआई 18 दिसंबर को डिप्टी कमिश्नर प्रभारी भंडारी के नेतृत्व में जीएसटी टीम ने झोकन बाग स्थित जय अम्बे प्लाईवुड और जय दुर्गा हार्डवेयर के ऑफिस और गोदामों पर छापा मारा था। यहां बड़ी टैक्स चोरी पकड़ी गई थी। केस को निपटाने के लिए फर्म मालिकों और सेंट्रल जीएसटी के अफसरों के बीच बड़ी डील हो चुकी थी। इसकी खबर सीबीआई तक पहुंची तो सीबीआई ने पल-पल का इनपुट जुटाना शुरू किया। इसमें पता चला- जब दोनों फर्मों पर छापा पड़ा तो मालिकों ने मामला निपटाने के लिए अधिवक्ता नरेश गुप्ता से बात की। नरेश ने सुपरिडेंटेंड अनिल कुमार से बात की और रिश्वत लेकर मामले को निपटाने की पेशकश की। तब अनिल बोला- बड़ी मात्रा में टैक्स चोरी है। मेडम प्रभा भंडारी भी तलाशी स्थल पर मौजूद हैं। फिर भी मदद करेंगे। फर्म मालिक लोकेश व राजू मंगतानी ने सुपरिडेंटेंड अनिल तिवारी और फिर अजय के आवास पर मीटिंग की। जहां पूरे मामले को निटपाने का सौदा हुआ। अफसरों ने मामले को निपटाने और कर को घटाकर 50 लाख करने के एवज में डेढ़ करोड़ रुपए की रिश्वत मांगी। फर्म मालिक ने रुपए कम करने के लिए कहा तो बोले कि मेडम ने रिश्वत की राशि कम करने के लिए मना कर दिया। पूरे डेढ़ करोड़ रुपए लगेंगे। 29 दिसंबर को नरेश ने राजू मंगनानी से कहा कि साहब को देने के लिए रुपए तैयार रखो। 30 दिसंबर को सीबीआई ने डिप्टी कमिश्नर समेत 5 आरोपियों को अरेस्ट कर 1.60 लाख रुपए, भारी मात्रा में गहने, प्रॉपर्टी के दस्तावेज बरामद किए थे।
https://ift.tt/ebqAYDr
🔗 Source:
Visit Original Article
📰 Curated by:
DNI News Live

Leave a Reply