साइबर ठगी के एक मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। चितईपुर थाना क्षेत्र के नेवादा स्थित राजेंद्र विहार कॉलोनी निवासी एवं एक निजी कंपनी में जनरल पद पर कार्यरत अनुज कुमार की शिकायत पर लंका थाना पुलिस ने अविशेक जैन और सवर्यदीप दास मजूमदार के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया है। डिप्टी एडमिनिस्ट्रेटर बताकर लिया रूपया
पीड़ित अनुज कुमार ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि कुछ दिन पूर्व अविशेक जैन नामक व्यक्ति उनसे मिला था। मुलाकात के दौरान आरोपी ने खुद को काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) का डिप्टी एडमिनिस्ट्रेटर बताया और विश्वविद्यालय में होने वाले एक टेंडर का हवाला दिया। आरोपी ने यह भी कहा कि टेंडर फीस जमा करने के लिए उसके पास तत्काल पैसों की कमी है और जल्द ही राशि लौटाने का आश्वासन दिया। आरोपी की बातों में आकर अनुज कुमार ने 22,500 रुपये सवर्यदीप दास मजूमदार के बैंक खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। पैसे ट्रांसफर होने के बाद जब अनुज को संदेह हुआ तो उन्होंने बीएचयू कार्यालय में जाकर जानकारी की। वहां से उन्हें पता चला कि न तो इस नाम का कोई कर्मचारी विश्वविद्यालय में कार्यरत है और न ही इस तरह का कोई टेंडर निकाला गया है। पुलिस अब आरोपी के तलाश में जुटी
लंका थाना प्रभारी राजकुमार ने बताया मामला साइबर फ्रॉड से जुड़ा हुआ है। पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेन-देन के माध्यम से आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आम जनता से भी अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा खुद को सरकारी या प्रतिष्ठित संस्थान का अधिकारी बताकर पैसे मांगने पर सतर्क रहें और बिना सत्यापन के किसी प्रकार का ऑनलाइन भुगतान न करें।
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