अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के एबीके बॉयज स्कूल में कंप्यूटर शिक्षक रहे राव दानिश की हत्या किसी तात्कालिक विवाद का नतीजा नहीं थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि उनकी हत्या मुखबिरी के शक में की गई थी और इसकी साजिश आठ साल पहले रची जा चुकी थी। इंस्टाग्राम पोस्ट से मिले अहम सुराग के आधार पर पुलिस ने शूटरों को पनाह देने वाले एक युवक को गिरफ्तार कर पूरे हत्याकांड का खुलासा किया है। एसएसपी नीरज कुमार जादौन ने गुरुवार को पुलिस लाइन में प्रेसवार्ता कर बताया कि सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के अमीर निशा निवासी सलमान कुरैशी को गिरफ्तार किया गया है। सलमान ने शूटरों को ठहराया, हत्या के दिन घटनास्थल तक पहुंचाया और बाद में उन्हें दिल्ली तक भगाने में मदद की। 2018 की हत्या से जुड़ी है कहानी पुलिस के अनुसार, वर्ष 2018 में AMU के हबीब हॉल के पास छात्र शाबेज की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में जुबैर सहित पांच लोगों के नाम सामने आए थे। घटना के बाद जुबैर फरार हो गया, जबकि उसके अन्य साथी जेल भेजे गए। ये सभी सलमान के करीबी दोस्त थे। आरोपियों को शक था कि इस केस में राव दानिश ने पुलिस को अहम जानकारी दी थी। तभी से उन्हें मुखबिर माना जाने लगा। तिहाड़ से अलीगढ़ जेल में बनी हत्या की योजना जुबैर को 2019 में दिल्ली से गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेजा गया था। उस पर हत्या, लूट समेत कई संगीन मुकदमे दर्ज थे। मई 2025 में उसे अलीगढ़ जेल शिफ्ट किया गया। इसी दौरान सलमान भी एक जानलेवा हमले के मामले में अलीगढ़ जेल पहुंचा। जेल में दोनों की मुलाकात हुई और यहीं राव दानिश की हत्या की योजना बनाई गई। बाद में सलमान पहले और अक्टूबर 2025 में जुबैर जमानत पर बाहर आ गया। इंस्टाग्राम पोस्ट बनी पुलिस के लिए क्लू जेल से छूटने के कुछ दिन बाद जुबैर ने मौलाना आजाद लाइब्रेरी के पास से इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट डाली, जिसमें लिखा था- ‘आ गया है अलीगढ़ का किंग, जल्द ही बड़ा धमाका होगा…’ इस पोस्ट के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की। पता चला कि यह इंस्टाग्राम अकाउंट दो आईडी से संचालित हो रहा था। जांच में एक अकाउंट सलमान से जुड़ा मिला। कॉल डिटेल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज से जुबैर के भाइयों फहाद और यासिर की भूमिका सामने आई। हत्या से एक दिन पहले अलीगढ़ पहुंचे शूटर पूछताछ में सलमान ने बताया कि 23 दिसंबर को उसने जुबैर के दोनों भाइयों फहाद और यासिर को अलीगढ़ बुलाया। दोनों दिल्ली के ओखला इलाके में रहते हैं। उसी दौरान सलमान का परिवार मुरादाबाद में एक शादी में गया हुआ था, जिससे फ्लैट खाली था। शूटरों को उसी फ्लैट में ठहराया गया और काले रंग की स्कूटी मेडिकल रोड स्थित फ्लैट के पास खड़ी की गई। लाइब्रेरी कैंटीन पर मारी गोली 24 दिसंबर की रात सलमान दोनों शूटरों को मेडिकल रोड तक छोड़कर लौटा। वहां से वे स्कूटी लेकर मौलाना आजाद लाइब्रेरी की कैंटीन पहुंचे। रात करीब 8:45 बजे राव दानिश को गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके बाद दोनों आरोपी सुलेमान हॉल की ओर से फरार हो गए। स्कूटी खाई में फेंकी, दिल्ली तक छोड़ा हत्या के बाद एक शूटर स्कूटी से और दूसरा सलमान की कार में बैठ गया। गभाना टोल से पहले स्कूटी को सड़क किनारे खाई में फेंक दिया गया। इसके बाद तीनों कार से दिल्ली रवाना हो गए। सलमान दोनों शूटरों को दिल्ली छोड़कर वापस अलीगढ़ लौट आया। पास में रहता था सलमान, इसलिए नहीं हुआ शक राव दानिश और सलमान दोनों अमीर निशा इलाके में पास-पास रहते थे और एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते थे। इसी वजह से शुरू में किसी को सलमान पर शक नहीं हुआ। लेकिन इंस्टाग्राम पोस्ट और तकनीकी साक्ष्यों ने पुलिस को आरोपी तक पहुंचा दिया। शूटरों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित एसएसपी नीरज कुमार जादौन ने बताया कि दोनों शूटरों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क और जुबैर की भूमिका पर स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी। फिलहाल पुलिस जांच आगे बढ़ा रही है।
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