अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) एक बार फिर सुर्खियों में है। सुलेमान हॉल की मस्जिद में शब–ए–बरात कार्यक्रम में मंगलवार को पाकिस्तानी मूल के संगठन ‘दावत–ए–इस्लामी’ से जुड़े मौलाना सुल्तान अटारी को आमंत्रित किया गया था। सोशल मीडिया पर पोस्टर वायरल होते ही छात्रों के एक गुट ने इसे यूनिवर्सिटी की साख और सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए विरोध शुरू कर दिया। दबाव बढ़ता देख प्रशासन ने कार्यक्रम पर रोक लगा दी। बुधवार को छात्रों के प्रॉक्टर ऑफिस पहुंचकर तकरीर की वीडियो दिखाने पर मामला एक बार फिर गरमा गया। हालांकि बाद में वीडियो में मौलाना न होने की बात कहकर छात्रों को समझाया गया। अब विस्तार से पढ़िए पूरा मामला मंगलवार रात सुलेमान हॉल में ‘ग्रैंड शब-ए-बरात कॉन्ग्रिगेशन’ प्रस्तावित था। जैसे ही आयोजकों ने इंटरनेट मीडिया पर पोस्टर जारी किया, विरोध के स्वर मुखर हो गए। छात्रों ने सवाल उठाया कि जिस संगठन का नाम उदयपुर के कन्हैया लाल हत्याकांड में सामने आया था, उसके प्रतिनिधि को एएमयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में मंच क्यों दिया जा रहा है? विवाद बढ़ता देख स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियां भी अलर्ट हो गईं। जानिए दावत-ए-इस्लामी और इसका विवाद दावत-ए-इस्लामी एक अंतरराष्ट्रीय सुन्नी इस्लामिक संगठन है। इसके इतिहास और भारत में इसकी स्थिति को समझना जरूरी है। इस संगठन की नींव 1981 में कराची (पाकिस्तान) में मौलाना इलियास कादरी द्वारा रखी गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य धार्मिक शिक्षा और ‘मदनी चैनल’ के जरिए इस्लाम का प्रचार करना था। भारत में यह संगठन ‘दावत-ए-इस्लामी इंडिया’ के नाम से संचालित होता है। हालांकि यह खुद को चैरिटी और शिक्षा से जुड़ा बताता है, लेकिन भारतीय जांच एजेंसियों की नजर इस पर तब टेढ़ी हुई जब राजस्थान के उदयपुर में टेलर कन्हैया लाल की निर्मम हत्या हुई। जांच में खुलासा हुआ कि हत्या के आरोपी इस संगठन की कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित थे। आगे भी रखी जाएगी नजर AMU के प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद नवेद खान ने मामले को शांत कराते हुए कहा कि जैसे ही संगठन की विवादित पृष्ठभूमि की जानकारी मिली, मौलाना को कार्यक्रम में शामिल होने से रोक दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कैंपस में किसी भी ऐसी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी जिससे विश्वविद्यालय की छवि धूमिल हो। प्रॉक्टर ने एक वायरल वीडियो का खंडन करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर चल रहा वीडियो सुल्तान अटारी का नहीं, बल्कि एएमयू के ही एक सदस्य का है। प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि बिना उचित स्क्रीनिंग के ऐसे विवादित संगठन से जुड़े व्यक्ति को निमंत्रण कैसे भेजा गया।
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