नागर कॉलोनी, खतौली की रहने वाली पूजा शर्मा ने यह साबित कर दिया है कि अगर हौसला मजबूत हो तो उम्र मायने नहीं रखतीं। अक्टूबर 2025 में किकबॉक्सिंग की शुरुआत करने वाली पूजा शर्मा ने कुछ महीनों में डिस्ट्रिक्ट, स्टेट और ज़ोनल लेवल तक का सफर तय करते हुए अब नेशनल चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई कर लिया है। वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ किकबॉक्सिंग ऑर्गनाइजेशन – इंडिया द्वारा जम्मू में आयोजित नॉर्थ ज़ोन हार्ड वेपन स्टाइल प्रतियोगिता में पूजा शर्मा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज़ मेडल अपने नाम किया। इस प्रतियोगिता में करीब 600 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। पूजा शर्मा बताती हैं कि उनकी किकबॉक्सिंग जर्नी की शुरुआत बिल्कुल अनजाने में हुई। वह जिस स्कूल में कार्यरत हैं, वहां के बच्चों को जिला स्तरीय किकबॉक्सिंग प्रतियोगिता में लेकर गई थीं। वहीं एक इवेंट को देखकर उन्हें महसूस हुआ कि मैं भी यह कर सकती हूं। स्कूल की प्रिंसिपल और कोऑर्डिनेटर ने भी पूजा को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके बाद पूजा ने मुज़फ्फरनगर स्थित श्री सूर्यदेव अकादमी जॉइन की, जहां कोच मनोज और कोच राखी के मार्गदर्शन में उन्होंने प्रशिक्षण शुरू किया। अश्मिता गेम्स से की शुरुआत उसी दौरान अश्मिता गेम्स ,खेलो इंडिया चल रहे थे। कोच ने पूजा से पूछा कि क्या वह डिस्ट्रिक्ट लेवल पर ट्रायल देना चाहेंगी। पूजा ने हामी भरी और सहारनपुर में डिस्ट्रिक्ट प्रतियोगिता खेली।
यहां सेलेक्शन हुआ और फिर मेरठ में स्टेट लेवल प्रतियोगिता खेली, जहां पूजा ने दो गोल्ड मेडल जीते। इसके बाद पूजा का चयन ज़ोनल प्रतियोगिता के लिए हुआ, जो 22 से 25 जनवरी के बीच जम्मू में आयोजित हुई। सीनियर कैटेगरी सबसे बड़ी चुनौती पूजा बताती हैं कि सीनियर कैटेगरी 19 से 40 वर्ष उनके लिए सबसे चुनौतीपूर्ण रही। जब 21 साल की खिलाड़ी से मुकाबला होता है, जो लगातार जम्प और किक मार रही होती है, तब मुश्किल लगता है। लेकिन अब नेशनल्स के लिए सेलेक्ट हो चुकी हूं, तो जंपिंग और किक्स पर ज्यादा मेहनत शुरू कर दी है। जीत के पल को याद करते हुए पूजा कहती हैं कि उन्हें खुद पर विश्वास नहीं हो रहा था। इतने युवा खिलाड़ी थे कि जीतना नामुमकिन सा लग रहा था, लेकिन साथ ही नेशनल्स का एक्साइटमेंट भी हो रहा था। 38 वर्षीय पूजा शर्मा एक 10 वर्षीय बेटे अभिराज की मां हैं और एक पब्लिक स्कूल में एडमिन के रूप में कार्यरत हैं। वह बताती हैं कि उन्हें घर, स्कूल और कोच—तीनों जगह से भरपूर सहयोग मिला।पूजा ने बताया की घर से पूरा सपोर्ट है, स्कूल में ज्यादा दबाव नहीं है और अकादमी में नेशनल्स को देखते हुए थोड़ी सख्ती है लेकिन कोच मेरे शरीर की स्थिति समझकर ट्रेनिंग देते हैं। बेटे के साथ करती हैं प्रैक्टिस पूजा बताती हैं कि शुरुआत में घरवालों को भी नहीं पता था कि वह खुद खेल रही हैं। वह असल में अपने बेटे का एडमिशन कराने अकादमी गई थीं। वहीं से लाठी और कटाना की ट्रेनिंग शुरू हुई। आज पूजा और उनका बेटा अभिराज रोज़ाना साथ प्रैक्टिस करते हैं। पूजा ने बताया की जब मैं जीतकर आती हूं तो मेरा बेटा सबसे ज्यादा खुश होता है। नेशनल्स और इंटरनेशनल का सपना पूजा शर्मा अब 24 से 28 मार्च के बीच चेन्नई में होने वाली नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लेंगी। उनका लक्ष्य सिर्फ नेशनल ही नहीं, बल्कि इंटरनेशनल लेवल पर भारत का प्रतिनिधित्व करना है। अपने पति श्रेय के बारे में पूजा कहती हैं की उन्होंने कभी सवाल नहीं किया, हर वक्त मेरा साथ दिया है। महिलाओं को संदेश पूजा शर्मा सभी महिलाओं को संदेश देती हैं की डर के आगे जीत है। फिटनेस के लिए, आत्मनिर्भर बनने के लिए और अपनी सुरक्षा के लिए हर महिला को डिफेंस सीखना चाहिए। समय लगेगा, लेकिन हो जाएगा।
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