बाराबंकी के जेब्रा पार्क, पल्हरी चौराहा परिसर में चल रहा चार दिवसीय 251 कुंडीय शक्ति संवर्धन गायत्री महायज्ञ संपन्न हो गया। चौथे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े, जहां यज्ञोपवीत, विवाह और दीक्षा संस्कार विधिवत संपन्न कराए गए। शांतिकुंज हरिद्वार से पधारे टोली नायक परमानंद द्विवेदी के निर्देशन में ये संस्कार संपन्न हुए। द्विवेदी ने कहा कि संस्कार मानव जीवन को उत्कृष्टता की ओर ले जाने वाले महामंत्र हैं, जो व्यक्ति और समाज दोनों के रूपांतरण का माध्यम बनते हैं। महायज्ञ के तीसरे और चौथे दिन परिसर में यज्ञ की सुगंध, मंत्रों की गूंज और भक्तिपूर्ण वातावरण बना रहा। सायंकाल 5000 वेदीय दीपों का सामूहिक प्रज्ज्वलन किया गया, जिससे पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक आभा से आलोकित हो उठा। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी सहभागिता की। कार्यक्रम में श्री दुबे ने ‘राज समर्थ तुम सशक्त संस्कार हुआ कैसे बनें’ विषय पर उद्बोधन दिया। उन्होंने सप्त आंदोलन, नशा निवारण और युवा जागरण पर विचार रखते हुए समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। इसी क्रम में शांतिकुंज हरिद्वार के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पांड्या का उद्बोधन मुख्य आकर्षण रहा। उन्होंने कहा कि गायत्री मिशन का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानव चेतना के उत्थान, नैतिक जागरण और जीवन में दिव्यता का विस्तार है। युवाओं को विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय से आगे बढ़ने की प्रेरणा भी दी गई। इस अवसर पर गायत्री परिवार से देशबंधु तिवारी, संजय चतुर्वेदी, एपी शर्मा, सत्य प्रकाश श्रीवास्तव, दिनेश दीक्षित, डॉ. ओ.पी. सिंह, डॉ. नीरज बाजपेई, अवधेश कुमार शुक्ला, कुलदीप अवस्थी, वीना शुक्ला, लक्ष्मी शुक्ला, शिवमंगल शुक्ल, कृष्ण कुमार शुक्ल, मुन्ना रावत सहित हजारों सदस्य उपस्थित रहे। चार दिवसीय महायज्ञ का सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ विधिवत समापन किया गया। परिसर में लगे पुस्तक मेले में श्रद्धालुओं ने हवन के उपरांत आध्यात्मिक साहित्य खरीदा। इस आयोजन ने नगरवासियों के हृदय में नई रोशनी और प्रेरणा की ज्योति प्रज्ज्वलित की। देखें सामूहिक यज्ञ की फोटो…
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