: पूर्व सांसद लल्लू सिंह, विधायक डॉक्टर अमित सिंह चौहान और अभय सिंह भारतीय जनता पार्टी के लिए नई चुनौती होंगे। अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदी सपा के घर में ताक झांक करके ताने मारने वाली भाजपा को सामने खड़ी हो रही चुनौती का हल नहीं सूझ रहा है। यह चुनौती उसे 2027 विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारी को लेकर है जिसकी कानाफूसी पार्टी नेताओं के बीच शुरू है। भाजपा से पांच बार विधायक, दो बार सांसद व पूर्व मंत्री रह चुके हैं लल्लू सिंह
पूर्व सांसद लल्लू सिंह चुनाव लोकसभा का हार चुके हैं। विद्यार्थी परिषद से राजनीति शुरू करने वाले पूर्व सांसद भाजपा से पांच बार विधायक, दो बार सांसद व पूर्व मंत्री रह चुके हैं। वह पार्टी के उन नेताओं की जमात के हैं जो अन्य दलों से आयातित नहीं है। पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा भी निर्विवाद है। पार्टी के सामने पूर्व सांसद के समायोजन की चुनौती है। विधायक वेद गुप्त के अमल गुप्त की उनके साथ सक्रिय राजनीति में एंट्री विधानसभा चुनाव से पहले अगर उनका समायोजन नहीं हुआ तो स्वाभाविक है वह विधानसभा में टिकट के दावेदार बनेंगे।
अयोध्या पार्टी के ही विधानसभा सीट से विधायक वेद प्रकाश गुप्त हैं। वह दूसरी बार निर्वाचित हुए हैं। गैर विवादित विधायक के रूप में उनकी पहचान है। पुत्र अमल गुप्त की उनके साथ सक्रिय राजनीति में एंट्री किसी से छिपी नहीं। तीसरी बार के टिकट की दावेदारी में अगर उनकी उम्र का उलहना देखकर पार्टी में उन्हें साइड किया जाएगा तो अमल गुप्त को वह अपने स्थान पर टिकट के लिए स्वाभाविक दावेदार बता पार्टी नेतृत्व के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
डॉक्टर अमित सिंह चौहान की। डॉक्टर चौहान से पहले उनकी मां शोभा सिंह बीकापुर से विधायक रहीं। पूर्व सिंचाई मंत्री मुन्ना सिंह चौहान की पत्नी है। जिले की राजनीति में गैर भाजपा राजनीति कि मुन्ना सिंह प्रमुख चेहरा रहे। असामयिक निधन के बाद बदली परिस्थितियों में भाजपा ने पत्नी शोभा सिंह को बीकापुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया, वह जीतीं भी। 2022 के चुनाव में पार्टी ने उनके पुत्र डॉक्टर अमित सिंह चौहान को उम्मीदवार बनाया जो अब विधायक है। ऐसे में बीकापुर सीट से उनकी भी दावेदारी स्वाभाविक है।
अभय सिंह गोसाईगंज सीट से दो बार विधायक निर्वाचित हो चुके हैं। दूसरी बार भी वह समाजवादी पार्टी के टिकट पर 2022 में निर्वाचित हुये। अब वह भाजपा के नजदीकी हो चुके हैं। मौजूदा विधायक होने से गोसाईगंज सेट पर भारतीय जनता पार्टी से उनकी दावेदारी को खारिज करना आसान नहीं। पार्टी के सामने यही वह सवाल है जो 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नेतृत्व को परेशान कर रहा है। परेशानी की वजह तीनों के सजातीय (क्षत्रिय) होने की है। जिले में पांच विधानसभा सीट है जिसमें मिल्कीपुर विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है। ऐसे में चार सीट ही बचीं। उसमें से एक रुदौली विधानसभा सीट से पार्टी के विधायक रामचंद्र यादव तीसरी बार निर्वाचित हुए। उनकी सीट को छोड़ दिया जाए तो सिर्फ तीन सीट अयोध्या, गोसाईगंज व बीकापुर बचती है। क्षत्रीय बिरादरी के प्रत्याशी को उतरेगी या फिर जातीय समीकरण सवाल है कि भाजपा तीनों विधानसभा सीटों पर क्षत्रीय बिरादरी के प्रत्याशी को उतरेगी। या फिर जातीय समीकरण साधेगी। यह वह सवाल है जिसका जवाब 2027 के विधानसभा चुनाव में नामांकन शुरू होने से पहले मिलना संभव नहीं लगता। सभी के समर्थक अपने-अपने नेता के टिकट की दावेदारी की कुलाचें भरने से नहीं थकते। पर इसे लेकर पार्टी में अंदर खाने खूब चर्चा है।
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