कुशीनगर जिले के हाटा तहसील क्षेत्र के सुकरौली विकासखंड स्थित रामपुर शोहरौना गांव में नई मतदाता सूची को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। गांव के ग्राम प्रधान, उनकी पत्नी और बेटे का नाम इस सूची से गायब पाया गया है। यह चौंकाने वाली घटना सामने आने के बाद न सिर्फ ग्राम पंचायत बल्कि पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है। ग्रामीण इसे सामान्य प्रशासनिक भूल मानने को तैयार नहीं हैं और इसके पीछे किसी बड़ी लापरवाही या साजिश की आशंका जता रहे हैं। जानकारी के अनुसार, नई वोटर लिस्ट गांव में पहुंचते ही ग्राम प्रधान परिवार के नाम न होने की बात सामने आई। इसके बाद गांव में हड़कंप मच गया। ग्राम प्रधान सहित कई ग्रामीणों ने बीएलओ और ग्राम सचिव के साथ बैठक कर मामले की जानकारी लेने की कोशिश की। बैठक में यह जानने का प्रयास किया गया कि आखिर नाम विलोपन किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत हुआ, लेकिन कोई ठोस कारण सामने नहीं आ सका। बीएलओ ने इस संबंध में किसी भी तरह के नाम विलोपन से इनकार किया है। उनका कहना था कि उनके द्वारा ग्राम प्रधान, उनकी पत्नी या बेटे का नाम नहीं हटाया गया है और उन्हें भी इस गलती के स्तर या कारण की जानकारी नहीं है। ग्राम प्रधान राजेंद्र वर्मा ने इस मामले पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि वह वर्षों से गांव में निवास कर रहे हैं और नियमित रूप से मतदान करते आए हैं। इसके बावजूद उनका, उनकी पत्नी और बेटे का नाम नई वोटर लिस्ट से गायब होना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सिर्फ उनके परिवार का ही नहीं, बल्कि गांव के कई समर्थकों का नाम भी मतदाता सूची से हटा दिया गया है। ग्राम प्रधान ने प्रशासन से जल्द से जल्द जांच कराकर सभी पात्र मतदाताओं का नाम पुनः जोड़ने की मांग की है। इस पूरे मामले पर हाटा विधायक मोहन वर्मा ने किसी भी प्रकार की साजिश से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जाएगी और यदि कोई त्रुटि पाई जाती है तो उसे सुधारा जाएगा। उनका परिवार वर्षों से इसी गांव में रह रहा है। यदि मतदाता सूची में नाम हटाने के पीछे कोई साजिश या जानबूझकर की गई लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कराई जाएगी। उधर,उप जिलाधिकारी हाटा योगेश्वर सिंह ने बताया कि वोटर लिस्ट में विलोपन और संशोधन की प्रक्रिया ब्लॉक मुख्यालय स्तर से होती है। यदि बड़ी संख्या में नाम गायब पाए गए हैं तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित ब्लॉक स्तर के कर्मचारियों की बनती है। मामले की जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वालों पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, यह मामला प्रशासन और राजनीति दोनों के लिए चुनौती बन गया है, और ग्रामीणों की नजर अब जांच के नतीजों पर टिकी हुई है।
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