गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज के पेडियाट्रिक विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. यशवंत राय के नेतृत्व में एमबीबीएस छात्रों की पढ़ाई में ‘स्मार्ट क्लास और पावर पॉइंट आधारित शिक्षा’ इन दोनों तरीकों में से कौन अधिक प्रभावी है, इसे जानने के लिए एक महत्वपूर्ण अध्ययन किया गया। इस रिसर्च टीम में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नमिता और डॉ. ध्रुव अग्रवाल को भी शामिल किया गया। डिजिटल तरीकों के प्रभाव को समझा गया भारत जैसे देशों में अभी भी पारंपरिक तरीकों से पढ़ाया जाता है। ऐसे में डिजिटल तरीकों का प्रभाव समझना जरूरी था। इसलिए इस स्टडी में यह जाना गया कि क्या स्मार्ट बोर्ड से पढ़ाने पर छात्रों की सीखने और याद रखने की क्षमता में सुधार होता है। 360 छात्रों को चुना गया, दो समान बैच बनाए गए अप्रैल से जुलाई 2025 के बीच जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में यह अध्ययन राष्ट्रीय स्तर पर नियंत्रित परीक्षाओं के साथ किया गया। कुल 450 छात्रों में से 360 को शामिल किया गया और दो समूहों में इन्हें बांटा गया। पहले समूह को स्मार्ट बोर्ड के माध्यम से पढ़ाया गया और दूसरे समूह को पावर पॉइंट स्लाइड्स से पारंपरिक तरीके से पढ़ाया गया। स्मार्ट बोर्ड समूह में शिक्षक स्क्रीन पर लिख सकते थे, चित्र हाइलाइट कर सकते थे और विभिन्न वीडियो व डिजिटल सामग्री जोड़ सकते थे। वहीं पावर पॉइंट समूह में केवल स्लाइड्स दिखाई गईं। तीन चरणों में किया गया मूल्यांकन स्टूडेंट्स के सीखने का मूल्यांकन OSCE के जरिए किया गया। पहले क्लास खत्म होते ही दोनों समूहों का प्रदर्शन लगभग समान पाया गया। एक महीने बाद स्मार्ट बोर्ड समूह में शामिल स्टूडेंट की समझने की क्षमता और याद रखने की क्षमता 46.1% थी तो पावर पॉइंट समूह में मात्र 40.3% ही रही। दो महीने बाद स्मार्ट क्लास छात्रों का प्रदर्शन 45% तो पावर पॉइंट ग्रुप का 39% यानी लंबे समय तक याद रखने में भी स्मार्ट क्लास अधिक प्रभावी रहा। टीचर–स्टूडेंट दोनों की प्रतिक्रिया स्मार्ट क्लास के पक्ष में छात्रों ने माना कि स्मार्ट क्लास अधिक रोचक, आसानी से समझने योग्य और याद रखने में सहायक है। शिक्षकों ने भी माना कि स्मार्ट बोर्ड क्लास में छात्रों की सहभागिता बढ़ी हालांकि पावर पॉइंट स्लाइड्स तैयार करना तुलनात्मक रूप से आसान रहा। केजीएमयू से ली अनुमति, अब शोध “इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च” में प्रकाशित डॉ. राय ने बताया कि बेसिक कॉन्सेप्ट्स मजबूत करने के उद्देश्य से उन्होंने केजीएमयू में एडवांस कोर्स इन मेडिकल एजुकेशन के तहत अनुमति ली। अध्ययन के सकारात्मक परिणाम सामने आने पर यह शोध इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित हो चुका है। इस अध्ययन में स्पष्ट हुआ कि वरिष्ठ छात्रों में सीखने और याद रखने की क्षमता बढ़ाने के लिए स्मार्ट बोर्ड आधारित शिक्षा पावर पॉइंट की तुलना में अधिक प्रभावी है। डिजिटल तकनीकों की उपलब्धता बढ़ने पर यह तरीका मेडिकल शिक्षा की क्वालिटी सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
https://ift.tt/6FzP8bd
🔗 Source:
Visit Original Article
📰 Curated by:
DNI News Live

Leave a Reply