जनपद में स्कूली वाहनों की परिवहन व्यवस्था की समीक्षा के लिए एक बैठक आयोजित की गई। जिलाधिकारी आलोक कुमार के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) चंद्रेश कुमार सिंह ने कलेक्ट्रेट सभागार में इसकी अध्यक्षता की। बैठक में विद्यालयों में संचालित होने वाले स्कूली वाहनों की सुरक्षा और नियमों के अनुपालन पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में एआरटीओ प्रियंवदा सिंह ने जनपद के सभी विद्यालयों में संचालित वाहनों की परमिट और फिटनेस की अद्यतन स्थिति प्रस्तुत की। उन्होंने विद्यालय प्रबंधकों को निर्देश दिए कि यदि कोई वाहन बेच दिया गया है या अनुपयोगी हो गया है, तो उसकी परमिट रद्द कराने के लिए परिवहन विभाग को अनिवार्य रूप से सूचित किया जाए, ताकि उसे सूची से हटाया जा सके। अपर जिलाधिकारी ने सभी विद्यालयों को इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। विद्यालयों को यह भी निर्देश दिए गए कि वे अपने स्कूली वाहनों को सड़क के किनारे खड़ा न करें। इसके बजाय, विद्यालयों के आसपास उचित पार्किंग व्यवस्था बनाकर ही वाहनों को पार्क किया जाए, जिससे सड़कों पर यातायात बाधित न हो। इसके अतिरिक्त, विद्यालयों को अपने स्कूली वाहनों पर नियुक्त चालकों और परिचालकों को निर्धारित हल्के ग्रे रंग की वर्दी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, ताकि उनकी पहचान आसानी से हो सके। साथ ही, विद्यालयों को अपने वाहन चालकों के लाइसेंस और चरित्र सत्यापन की रिपोर्ट परिवहन विभाग को अनिवार्य रूप से सौंपने को भी कहा गया। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि किसी भी विद्यालय में कोई भी वाहन बिना फिटनेस के संचालित नहीं होना चाहिए। सभी विद्यालयों को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया गया। अपर जिलाधिकारी ने परिवहन विभाग को निर्देश दिए कि जनपद के सभी स्कूली वाहनों का शत-प्रतिशत सत्यापन किया जाए। वाहनों की परमिट और फिटनेस की जांच एक निश्चित समय अंतराल पर की जाती रहे और सभी अनफिट वाहनों का चालान कर उन्हें बंद कराया जाए। उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लेने और यह सुनिश्चित करने को कहा कि किसी भी विद्यालय में एक भी अनफिट वाहन संचालित न हो। इसके अतिरिक्त, 15 वर्ष से पुराने वाहनों की पहचान करने के निर्देश भी दिए गए।
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