सैदपुर नगर में बीते 4 वर्षों से प्रतिवर्ष स्वच्छ गंगा मिशन के नाम पर 40 लाख रूपयों को गंगा स्वच्छता का दिखावा कर कागजों पर खर्च किया जा रहा है गंगा नदी में गिरने वाले नालों के पानी के जैविक उपचार के नाम पर नगर के दर्जनों नालों में से कुछ नालों के पास खाली प्लास्टिक का ड्रम रखकर सिर्फ कागजों पर नालों में लाखों रुपए का सूक्ष्म जीव घुलित द्रव्य गंगा स्वच्छता के नाम पर बहा दिया जा रहा है। दो वर्षों तक इस बजट से नदी के किनारे नालों के पास सीमेंट की टंकियां बनवाई गई। जो हमेशा खाली ही रहीं। बाढ़ में इन टंकियों के डूब कर क्षतिग्रस्त हो जाने के बाद पुनः टंकियों को बनवाया गया। जिसके असफल होने पर कुछ नालों के पास टोंटी लगे प्लास्टिक के खाली ड्रम रखे गए। जिसमें आज तक सूक्ष्म जीव घुलित द्रव्य नहीं भरा जा सका है। अब इन प्लास्टिक के ड्रम का उपयोग लोग कूड़ेदान के रूप में कर रहे हैं। गंगा नदी के किनारे गिरते नालों में लोहे की जालियां लगवाई गई। जो रखरखाव और साफ सफाई के अभाव में टूट चुकी है। प्लास्टिक आदि कचरा युक्त गंदा पानी अब सीधे गंगा नदी में जा रहा है। इस बार केंद्रीय बजट पर सरकार ने स्वच्छ गंगा मिशन के लिए लगभग 3 हजार करोड रुपए का बजट निर्धारित किया है। इस पर स्थानीय लोगों सहित सभासद सुनील यादव ने कहा कि बीते कई वर्षों से जमीन के अभाव में नगर पंचायत में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण रुका हुआ है। इस तरह गंगा स्वच्छता के नाम पर प्रतिवर्ष लाखों रुपए की बंदरबांट से अच्छा है कि सरकार इस पैसे से एसटीपी निर्माण के लिए जमीन खरीद लेती। यह खाली ड्रम रखकर अध्यक्ष लिपिक और ठेकेदार द्वारा लाखों रुपए खर्च करने से मां गंगा साफ नहीं होंगी। मामले में सैदपुर नगर पंचायत के प्रभारी अधिशासी अधिकारी एसडीएम रामेश्वर सुधाकर ने कहा कि जांच कराई जाएगी। अनियमितता मिलने पर कार्रवाई होगी।
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