उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में नए साल के पहले दिन निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद एक विशाल जुलूस निकाला गया। बिना अनुमति के निकाले गए इस जुलूस में सैकड़ों लोग शामिल हुए, जिनके हाथों में तलवारें भी देखी गईं। शहर की सड़कों पर निकले इस जुलूस में दर्जनों घोड़े और सैकड़ों की संख्या में युवा डीजे की धुन पर नाचते-गाते हुए आगे बढ़ रहे थे। इसमें बड़ी संख्या में किशोरियां, युवतियां और युवा शामिल थे, और कई युवाओं के हाथों में तलवारें थीं। यह जुलूस राष्ट्रीय अंबेडकर सेना द्वारा ‘विजय दिवस’ के रूप में आयोजित किया गया था। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग महासंघ और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी इसमें भाग लिया। आयोजकों ने इसे सामाजिक चेतना और महापुरुषों के सम्मान में एक कार्यक्रम बताया। जुलूस दूबेपुर ब्लॉक की पुरानी हवाई पट्टी से शुरू हुआ, जिसमें दर्जनों गांवों के लोग शामिल हुए। यह कलेक्ट्रेट गेट और विकास भवन के सामने से होते हुए राजीव गांधी पार्क में समाप्त हुआ, जहां एक प्रदर्शन भी किया गया। इस दौरान ‘जय भीम’ और ‘बाबा साहब अमर रहें’ के नारों से सुल्तानपुर गूंज उठा। कार्यक्रम में मुख्य वक्ताओं ने समाज में शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने पर जोर दिया। उदय प्रताप कोरी उर्फ उदल ने कहा कि उनका उद्देश्य राजनीति नहीं, बल्कि अंतिम व्यक्ति तक अधिकारों की जानकारी पहुंचाना और डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान की रक्षा करना है। वक्ताओं ने बताया कि सुल्तानपुर में 2017 से लगातार ऐसे आयोजन किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य युवाओं को उनके गौरवशाली इतिहास से परिचित कराना है। कार्यक्रम के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल भी तैनात रहा।
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