सुल्तानपुर कोर्ट ने 23 साल पुराने हत्या के एक मामले में अमेठी के तीन सगे भाइयों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, प्रत्येक दोषी पर 42,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। यह फैसला स्पेशल जज एससी/एसटी कोर्ट ने सुनाया। दोषी ठहराए गए अभियुक्तों में अवधेश प्रताप सिंह के पुत्र शेष प्रताप सिंह, शिवफूल सिंह और बृजेश प्रताप सिंह शामिल हैं। ये सभी अमेठी के जगदीशपुर थाना क्षेत्र के मड़वा गांव के निवासी हैं। न्यायालय ने उन्हें भारतीय दंड संहिता (भादवि) की धारा 302/149 के तहत आजीवन कारावास और 10,000 रुपये का अर्थदंड दिया। इसके अतिरिक्त, धारा 147 भादवि में 2 वर्ष का सश्रम कारावास और 2,000 रुपये का अर्थदंड, तथा धारा 148 भादवि में 2 वर्ष का सश्रम कारावास और 2,000 रुपये का अर्थदंड भी सुनाया गया। अर्थदंड अदा न करने पर दोषियों को 2 माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। यह घटना 6 अक्टूबर 2002 को हुई थी। अधिवक्ता गोरख नाथ शुक्ला के अनुसार, घटना का कारण दोषियों की गाय द्वारा वादी गोपीचंद के खेत में बोई गई मक्का चर लेना था। इसकी शिकायत करने पर नाराज होकर दोषियों ने गोपीचंद को बंदूक से गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। वादी गोपीचंद पुत्र भगौती, निवासी मन्धा, थाना जगदीशपुर, अमेठी की तहरीर पर जगदीशपुर थाने में मामला दर्ज किया गया था। क्षेत्राधिकारी रवीन्द्र कुमार सिंह ने मामले की विवेचना की। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद 25 नवंबर 2002 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया। ट्रायल के दौरान छह गवाहों को पेश किया गया। इस मामले में कुल पांच आरोपी थे, जिनमें से दो की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है। शेष तीन अभियुक्तों को अब सजा सुनाई गई है। डीजीसी क्रिमिनल राम अचल मिश्र ने बताया कि सहायक शासकीय अधिवक्ता गोरख नाथ शुक्ला की प्रभावी पैरवी के कारण अभियुक्तों को सजा मिल सकी।
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