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सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने गरीबी की नई-परिभाषा पर सवाल उठाए:लिखा- यह गरीबी का खत्म होना नहीं बल्कि गरीबों को कागजों से गायब करना है

संभल से समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने बजट 2026 पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 25 करोड़ लोगों के गरीबी से बाहर आने के दावे को भ्रामक बताया है। सांसद बर्क ने आरोप लगाया कि सरकार गरीबी कम करने के बजाय उसकी परिभाषा बदलकर आंकड़ों का जादू दिखा रही है। उन्होंने कहा कि इस दावे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर बयान जारी करते हुए बर्क ने कहा कि मौजूदा मानकों के अनुसार, शहरी क्षेत्र में ₹1,944 प्रतिमाह और ग्रामीण क्षेत्र में ₹1,632 प्रतिमाह आय वाले व्यक्ति को अब गरीब नहीं माना जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी कम आय में जीवन यापन करने वाला व्यक्ति कैसे गैर-गरीब हो सकता है। बर्क ने कहा, “जब गरीब की परिभाषा ही इतनी नीचे तय कर दी जाए, तो आंकड़ों में गरीबी अपने आप कम दिखने लगती है। यह गरीबी का खत्म होना नहीं, बल्कि गरीबों को कागज़ों से गायब करना है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता को सच्चाई बताने के बजाय संख्याओं के जरिए भ्रम पैदा कर रही है। बर्क ने बजट को “सिर्फ आंकड़ों का बजट” करार दिया और कहा कि इसमें गरीबों, किसानों, महिलाओं, युवाओं, अल्पसंख्यकों और आम आदमी के लिए कोई ठोस उम्मीद नजर नहीं आती। सांसद बर्क के अनुसार, यह बजट जमीनी हकीकत से कटा हुआ है और इससे देश के कमजोर तबकों में निराशा बढ़ी है।


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